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उत्तर प्रदेश

मथुरा-आगरा नगर निगम को भारी पड़ी लापरवाही : 65 करोड़ का जुर्माना

📅 24 April 2024, 11:58 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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मथुरा-आगरा नगर निगम को भारी पड़ी लापरवाही : 65 करोड़ का जुर्माना
मथुरा-आगरा नगर निगम को भारी पड़ी लापरवाही : 65 करोड़ का जुर्माना

मथुरा : एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ आगरा और मथुरा-वृंदावन में यमुना के प्रदूषण मामले में 65 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है. इस रकम का उपयोग यहां के पर्यावरण सुधार के लिए किया जायेगा.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा और मथुरा के नगर निगमों पर 65 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है. एनजीटी ने कहा ये रकम नगर निगमों को तीन महीने के अंदर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को जमा करनी होगी. डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर ये आदेश जारी किया गया है.

एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ आगरा और मथुरा-वृंदावन में यमुना के प्रदूषण मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. इसमें कहा गया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से जल अधिनियम के प्रावधानों का घोर उल्लंघन किया जा रहा है. इस 65 करोड़ के जुर्माने की राशि का उपयोग आगरा, मथुरा और वृन्दवान में पर्यावरण सुधार के लिए किया जायेगा.

एनजीटी की बेंच ने कहा, यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि यमुना नदी की जल पारिस्थितिकी की सुरक्षा और उसकी सफाई राज्य का दायित्व था, लेकिन इसमें वो बुरी तरह से फेल रहा. ट्रिब्यूनल ने कहा कि आगरा नगर निकाय ने भी सहमति के बिना स्थापित दो एसटीपी का संचालन करके अधिनियम का उल्लंघन किया है.

200 पन्नों के फैसले में, पीठ ने कहा कि दोनों स्थानों के नगर निगम और उनके सीवेज का संचालन करने वाली एजेंसियों ने निर्वहन को रोककर प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है. आगे कहा गया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से जल अधिनियम के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है. इस मामले में वे परिणामी, निवारक, दंडात्मक और उपचारात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी है.

बेंच ने कहा यमुना नदी किसी दैवीय कार्य से प्रदूषित नहीं हुई है बल्कि लोगों ने इसे प्रदूषित किया है. इससे भी अधिक, अधिकारियों की लापरवाही, नदी के प्रति ईमानदारी, चिंता और श्रद्धा की कमी के कारण नदी इतनी ज्यादा प्रदूषित है. पर्यावरण मुआवजे की राशि का उपयोग आगरा, मथुरा और वृन्दावन क्षेत्रों में पर्यावरण के सुधार के लिए करेगा. जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त समिति द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा.

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