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उज्जैन के इस गरबा में फिल्मी गाने बैन : सैकड़ों कन्याएं परंपरागत वेशभूषा में कर रही है, माता की आराधना

📅 06 October 2024, 12:35 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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उज्जैन के इस गरबा में फिल्मी गाने बैन : सैकड़ों कन्याएं परंपरागत वेशभूषा में कर रही है, माता की आराधना
उज्जैन के इस गरबा में फिल्मी गाने बैन : सैकड़ों कन्याएं परंपरागत वेशभूषा में कर रही है, माता की आराधना

उज्जैन. धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो नवरात्रि के दौरान गरबे के माध्यम से कई जगहों पर माता की आराधना की जा रही है। लेकिन, शहर में एक ऐसे परंपरागत गरबा उत्सव का आयोजन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों कन्याएं प्रतिदिन 3:30 घंटे तक परंपरागत वेशभूषा में माता की आराधना कर रही है। 

उज्जैन के पिपलीनाका क्षेत्र में बाबा गुमानदेव हनुमान मंदिर प्रांगण में पिछले 14 वर्षों से परंपरागत गरबा उत्सव का आयोजन बाबा गुमानदेव हनुमान परिवार के द्वारा किया जा रहा है। इस गरबा उत्सव की शुरुआत वर्ष 2010 में शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्यामनारायण व्यास के द्वारा की गई थी। इसके बाद से ही यह गरबा उत्सव प्रतिवर्ष भव्य होता जा रहा है। इस के गरबा उत्सव की जानकारी देते हुए बाबा गुमानदेव हनुमान परिवार के गादीपति और कार्यक्रम संयोजक पंडित चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया कि भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने और मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए प्रतिवर्ष परंपरागत गरबा उत्सव मंदिर प्रांगण में आयोजित किया जाता है। यह गरबा उत्सव सिर्फ कहने के लिए ही परंपरागत नहीं है। यहां सिर्फ 3 वर्ष से 11 वर्ष की कन्याएं ही गरबा कर सकती हैं। वर्तमान में 500 से अधिक कन्या प्रतिदिन गरबा प्रांगण में शाम 7 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक गरबा कर रही है। शहर में होने वाले अन्य गरबा आयोजन से यह कार्यक्रम भिन्न इसीलिए है, क्योंकि इस आयोजन में फिल्मी गानों पर गरबा नहीं होता है। साथ ही इस बात का भी पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता है कि सिर्फ 3 से 11 वर्ष तक की कन्याएं गरबा उत्सव कार्यक्रम में शामिल हो। 

गरबा पांडाल की सुरक्षा कुल 70 लोगों की टीम के द्वारा की जाती है। बाबा गुमानदेव हनुमान परिवार के सभी सदस्यों की इस गरबा उत्सव के दौरान अलग-अलग जिम्मेदारी तय की जाती है। कुछ लोग गेट पर खड़े होकर हर आने जाने वाले व्यक्ति पर अपनी निगाहें रखते हैं तो वहीं कुछ मंच की व्यवस्था, कुछ गरबे की व्यवस्था के साथ ही कुछ लोगों को प्रसादी के व्यवस्था भी दी जाती है। टीम के संयुक्त प्रयासों से ही यह गरबा लगातार ख्याति प्राप्त कर रहा है।

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