Saturday, 21 March 2026

उत्तर प्रदेश

कानपुर में कलावा बांधने और कड़ा पहनने वाले हिंदू युवक की पिटाई

S.P.MITTAL BLOGGER
कानपुर में कलावा बांधने और कड़ा पहनने वाले हिंदू युवक की पिटाई
कानपुर में कलावा बांधने और कड़ा पहनने वाले हिंदू युवक की पिटाई

बनारस की पवित्र गंगा में इफ्तार पार्टी...हड्डियां नदी में डाली।

जम्मू यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में जिन्ना की जीवनी भी शामिल।

भारत में जब 25 करोड़ मुसलमान सुरक्षा और सम्मान के साथ रह रहे है, तब ऐसी घटनाएं उचित नहीं।

S.P.MITTAL BLOGGER

दुनिया के अधिकांश मुस्लिम देश इन दिनों भीषण युद्ध की त्रासदी झेल रहे हैं। मुसलमान न केवल मारे जा रहे हैं, बल्कि पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। इसके विपरीत भारत में 25 करोड़ मुसलमान सुरक्षा और सम्मान के सााि जीवनयापन कर रहे हैं। मुसलमानों ने 21 मार्च को उत्साह और उमंग के साथ ईद का पर्व भी मनाया। भारत में मुसलमानों की खुशियां इसलिए है कि ये 100 करोड़ हिंदुओं के साथ रह रहे हैं।

मुसलमान अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुरूप रहे, इस पर किसी भी हिंदू को ऐतराज नहीं है, इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि मुसलमान भी सनातन धर्म और संस्कृति का सम्मान करें, लेकिन 16 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के बनारस में पवित्र गंगा नदी में मुस्लिम युवकों ने नाव पर सवार कर इफ्तार पार्टी की। इसके लिए मुस्लिम युवकों ने नाव को जबरन अपने कब्जे में लिया। नाव पर सवार होकर इन युवकों ने चिकन की हड्डियां सारेआम पवित्र नदी में फेंकी।

नाव पर हुई इस इफ्तार पार्टी का युवकों ने वीडियो भी बनाया। इतना ही नहीं नाव गंगा नदी और मस्जिद को दिखा कर इन युवकों ने सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने का काम भी किया। इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने सभी 14 आरोपी मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।

हालांकि गिरफ्तारी के बाद आरोपी युवकों ने अपनी गलती स्वीकारी और अपने कृत्य के लिए माफी भी मांगी। लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन युवकों को ऐसा कृत्य करना चाहिए था? मुस्लिम धर्मगुरु शहाबुद्दीन बरेलवी ने इस कृत्य को पूरी तरह इस्लाम विरोधी माना है। उन्होंने कहा कि रमजान माह में उपवास के बाद इफ्तार की रस्म तो बहुत सादगी और अकीदत के साथ की जानी चाहिए। नदी में नाव में सवार होकर ऐसी इफ्तारी की इस्लाम कभी भी इजाजत नहीं देता।

जिन्ना की जीवनी : इतिहास गवाह है कि देश के विभाजन में मुस्लिम कट्टरपंथी नेता मोहम्मद अली जिन्ना की जिद रही। 1947 में जब अंग्रेज भारत को स्वतंत्र कर रहे थे, तब जिन्ना ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुसलमान भारत में हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते, इसलिए मुसलमानों के लिए अलग देश बनाया जाए। जिन्ना की इस जिद के चलते ही मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया गया। जिन्ना की वजह से ही पाकिस्तान में लाखों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ.

लेकिन अब उसी जिन्ना की जीवनी भारत के जम्मू कश्मीर राज्य की जम्मू यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल की गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस शासित जम्मू कश्मीर की जम्मू यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विषय की पुस्तक में जिन्ना की जीवनी को शामिल करते हुए उन्हें अल्पसंख्यक वर्ग का नेता बताया गया है। हालांकि अब जिन्ना की जीवनी का विरोध किया जारहा है, लेकिन सवाल उठता है कि जिस जिन्ना की वजह से देश का विभाजन हुआ.

क्या उस जिन्ना की जीवनी भारत में पढ़ाई जानी चाहिए? जाहिर है कि जम्मू यूनिवर्सिटी में ऐसी विचारधारा हावी है जो आज भी जिन्ना को अल्पसंख्यकों का नेता मानती है। जिन्ना की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने से जम्मू कश्मीर के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कलावा बांधने पर टिप्पणी : उत्तर प्रदेश के कानपुर के युवक राहुल कुमार की कुछ मुस्लिम युवकों ने इसलिए पिटाई कर दी कि उसने अपने हाथ में कलावा बांध रखा था और कड़ा भी पहना हुआ था। कलेवा और कड़ा सनातन संस्कृति का प्रतीक है। लेकिन कुछ युवकों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने राहुल को बुरी तरह पीटा, हालांकि अब पुलिस ने आरोपी युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। 

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