Wednesday, 06 May 2026

धर्मशास्त्र

Shani Dev : घर के मंदिर में क्यों नहीं रखी जाती शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर, जानिए क्या है इसके पीछे कारण

paliwalwani
Shani Dev : घर के मंदिर में क्यों नहीं रखी जाती शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर, जानिए क्या है इसके पीछे कारण
Shani Dev : घर के मंदिर में क्यों नहीं रखी जाती शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर, जानिए क्या है इसके पीछे कारण

Shani Dev Murti Niyam : शनिदेव नवग्रहों में से एक हैं, जिन्हें कर्मफल दायक कहा जाता है। हिंदू घरों में बने पूजा स्थान पर विराजमान लगभग सभी देवी-देवताओं के आपने दर्शन जरूर किए होंगे।

किसी की मूर्ति पूजी जाती है, तो किसी की तस्वीर पर शीश झुकाया जाता है। लेकिन शनि देवता की फोटो या मूर्ति शायद ही आपने किसी के घर में रखी देखी होगी। तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मंदिरों में पूजे जाने वाले शनिदेव की मूर्तियां या तस्वीरें घर के मंदिरों क्यों नहीं होती हैं। असल में इसके पीछे कारण शनि देव को मिला एक श्राप बताया जाता है। चलिए जानते हैं क्या है पौराणिक कहानी।

अपशकुन और आर्थिक नुकसान

ऐसा कहा जाता है सुबह और शाम घर के मंदिर में विराजमान गणेश, विष्णु, शिव, लक्ष्मी आदि देवी-देवताओं के दर्शन मात्र से मानसिक शांति प्राप्त होती है, लेकिन शनि मन की शांति के लिए शनि देव को घर में विराजमान करने की मनाही है। शनि देव को लेकर एक विशेष नियम है।

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, शनिदेव की मूर्ति, तस्वीर या यंत्र रखना अशुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव की मूर्ति को घर के पूजा स्थान में विराजमान करने से अपशकुन और आर्थिक नुकसान होता है। परिवार में कलह और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, आप घर में रहकर शनिदेव की आरती और मंत्र जप कर सकते हैं।

घर में शनिदेव की मूर्ति रखना क्यों वर्जित?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव श्री कृष्ण के परम भक्त थे और वे उनकी भक्ति में लीन रहते थे। एक बार शनि देव की पत्नी उनकेपास आईं, लेकिन ध्यान और भक्ति में लीन शनिदेव ने पत्नी के अनेक प्रयासों के बावजूद उन्हें अनदेखा कर दिया। तब वह क्रोधित हो गईं और अपने ही पति को ठोर श्राप दिया।

उन्होंने शनि देव को श्राप देते हुए कहा कि जो कोई भी प्राणी उन्हें देखेगा उसे जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। मान्यता है कि तभी से शनिदेव के दर्शन डर का कारण माना जाता हैं। यही वजह है कि शनिदेव की दृष्टि सीधे तौर पर हम पर ना पड़े इसलिए घर में उनकी तस्वीर या मूर्ति नहीं स्थापित की जाती है। 

मंदिर में की जाती है शनि देव की पूजा

माना जाता है कि इस श्राप के कारण, जिस व्यक्ति या स्थान पर शनिदेव की दृष्टि पड़ती है उसके जीवन में विपत्तियां आने लगती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की सीधी दृष्टि पड़ने से व्यक्ति के जीवन में अप्रत्याशित समस्याएं और बीमारियां आ सकती हैं। इससे बचत का अपव्यय, कर्ज में वृद्धि और व्यापार में हानि जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

शनि की सीधी दृष्टि पड़ने से आशंका रहती है कि घर में लक्ष्मी स्थिर नहीं रहेंगी, इसलिए लोग घर में शनि की मूर्ति रखने से बचते हैं। घर में उनकी तस्वीर रखने के बजाय, शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाना, शनि चालीसा पढ़ना और उनके नाम पर दान-पुण्य करना ज्यादा शुभ माना जाता है। 

हालांकि, कुछ लोग घर में शनि यंत्र रखते हैं। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कम होते हैं, लेकिन पंडित या ज्योतिषियों द्वारा की गई विधिपूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ही शनि यंत्र घर में रखा जाता है, जिसके लिए शनिवार का दिन और उत्तर व पश्चिम दिशा शुभ मानी जाती है।

मंदिरों में ही शनिदेव के दर्शन और पूजन की विधान 

घर में ऐसी मूर्तियां होनी चाहिए जो शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिबिंब हो। चूंकि, शनि देव का रूप भयानक और कठोर शक्ति वाला माना जाता है। शनि की तीक्ष्ण ऊर्जा घर की शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती है। कहा जाता है कि घर का वातावरण उस ऊर्जा को संतुलित नहीं करता है। इसलिए मंदिरों में ही शनिदेव के दर्शन और पूजन की विधान है। 

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● Disclaimer :इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.
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