Wednesday, 20 May 2026

उत्तर प्रदेश

पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ड्रेस कोड लागू : मर्यादित वस्त्रों में ही प्रवेश जैन समाज के लिए अनुकरणीय पहल

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पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ड्रेस कोड लागू : मर्यादित वस्त्रों में ही प्रवेश जैन समाज के लिए अनुकरणीय पहल
पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ड्रेस कोड लागू : मर्यादित वस्त्रों में ही प्रवेश जैन समाज के लिए अनुकरणीय पहल

राजेश जैन दद्दू 

उत्तर प्रदेश.

उत्तर प्रदेश, बागपत जिले के श्री पार्श्वनाथ प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में मंदिर प्रबंधन समिति ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर भारत वर्षीय जैन समाज को संदेश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए मर्यादित शालीन पहनावे को लेकर नई पहल  शुरूआत की है. धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मंदिर परिसर में ड्रेस कोड संबंधी साइन बोर्ड  लगाए गए हैं, जो स्थानीय ही नहीं, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं.

मंदिर ट्रस्ट समिति की अपील  की है कि कोई भी श्रद्धालु भारतीय संस्कृति के अनुरूप मर्यादित वस्त्र पहनकर भारतीय वेशभूषा में ही मंदिर में प्रवेश करें. बोर्ड में जींस-टॉप, स्कर्ट, बरमूडा और हाफ पैंट जैसे आधुनिक परिधानों से परहेज करने को कहा गया है, साथ ही महिलाओं और बालिकाओं से सिर ढककर मंदिर में प्रवेश करने  की अपील भी की गई है.

ट्रस्ट कमेटी के इस प्रेरणा दायक निर्णय का इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन महावीर ट्रस्ट के  अध्यक्ष अमित कासलीवाल, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन, टीके वेद हंसमुख गांधी, भुपेंद्र जैन, सुशील पांड्या, प्रदीप बड़जात्या एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद् की श्रीमती मुक्ता जैन एवं रेखा जैन श्रीफल एवं भारत वर्षीय समाज जन के लिए बहुत ही अच्छा एवं अनुकरणीय पहल बताया और ट्रस्ट कमेटी को बधाई दी.

    • मंदिर ट्रस्ट द्वारा मर्यादित वस्त्रों की व्यवस्था : समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि जो श्रद्धालु अनजाने में मर्यादा के अनुकूल वस्त्र पहनकर नहीं आ पाए तो उनके लिए मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्रों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि कोई भी श्रद्धालु दर्शन से वंचित न रहे.
    • उद्देश्य : मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह कदम मंदिर की पवित्रता, गरिमा एवं भारतीय संस्कृति को बनाए रखने के लिए उठाया गया है. दिगंबर जैन परंपरा में मंदिर त्याग, वैराग्य एवं आत्म-साधना का केंद्र है, इसलिए यहाँ शालीन वेशभूषा आवश्यक है.
    • चर्चा का विषय : यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है. कई अन्य जैन मंदिरों में भी इस तरह की पहल की माँग उठ रही है.
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