उत्तर प्रदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला वकीलों के लिए बीमा जरुरी
paliwalwani
इलाहाबाद. एक अहम कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए एक व्यापक इंश्योरेंस योजना बनाने की संभावनाओं को तलाशा जा सके। यह कदम तब उठाया गया, जब कोर्ट ने ऐसे कई मामले देखे जिनमें वकीलों को गंभीर और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी के दौरान इलाज करवाने में भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने यह आदेश 2024 में दायर एक PIL याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका हाईकोर्ट के प्रैक्टिसिंग वकील (हरि प्रसाद गुप्ता) ने एक राज्य विधि अधिकारी (नीरज चौरसिया) के संबंध में दायर की थी, जिनका एक गंभीर सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया, लेकिन वे अपने इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे।
इसी तरह 2 अप्रैल, 2026 को एक और आवेदन दायर किया गया, जिसमें बेंच को एक अन्य प्रैक्टिसिंग वकील (सुधीर चौधरी) की मेडिकल स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। सुधीर चौधरी ब्रेन हेमरेज का इलाज करवा रहे हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे अपना इलाज जारी रखने में असमर्थ हैं।
इस मेडिकल इमरजेंसी का तुरंत संज्ञान लेते हुए बेंच ने अपने 30 मई, 2024 के पिछले आदेश का हवाला दिया। उस आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह पूरे UP राज्य में राज्य सरकार की ओर से पेश होने वाले वकीलों के लिए एक इंश्योरेंस योजना बनाने पर विचार करे।
वकीलों को बार-बार होने वाली ऐसी गंभीर आर्थिक दिक्कतों को देखते हुए बेंच ने अब निर्देश दिया है कि एक अलग जनहित याचिका 'In Re-Suo Motu Insurance Scheme etc for Lawyers in the State of U.P.' (यूपी राज्य में वकीलों के लिए स्वतः संज्ञान इंश्योरेंस योजना आदि) के नाम से दर्ज की जाए।
डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि अवध बार एसोसिएशन (अपने सचिव के माध्यम से), बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश (अपने सचिव के माध्यम से) और यूपी के प्रधान सचिव (विधि) या लीगल रिमेंबरेंसर को इस नई दर्ज की गई स्वतः संज्ञान याचिका में विरोधी पक्ष के रूप में शामिल किया जाए। बेंच ने अवध बार एसोसिएशन के सचिव को यह भी निर्देश दिया कि वे सुधीर कुमार चौधरी के इलाज के लिए धनराशि जारी करने के उनके तत्काल अनुरोध पर मौजूदा नियमों और प्रथाओं के अनुसार विचार करें। इस मामले की सुनवाई इसी हफ़्ते होगी।
- खंडपीठ ने कहा, “हमें उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल इस संबंध में कुछ रचनात्मक और सकारात्मक योजना लेकर आएगी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इसमें सरकारी एडवोकेट भी शामिल होंगे। इसलिए इस संबंध में सरकार पर भार नहीं डाला जाएगा। न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया कि बीमा कंपनी की ओर से पेश होने वाले वकीलों की सेवाओं का उपयोग इस संबंध में किया जा सकता है।
- “ खंडपीठ ने यह आदेश पार्टी-इन-पर्सन आलोक कुमार मिश्रा द्वारा राज्य के वकीलों के लिए बीमा लाभ की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पारित किया। जनहित याचिका अन्य याचिका से जुड़ी हुई है, जो प्रैक्टिशनर हाईकोर्ट एडवोकेट (हरि प्रसाद गुप्ता) द्वारा राज्य विधि अधिकारी (नीरज चौरसिया) के संबंध में दायर की गई, जो हाल ही में एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। यह देखते हुए कि यह सामान्य रूप से वकीलों और विशेष रूप से राज्य विधि अधिकारियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा है
गंभीर बीमारियों में वकीलों की आर्थिक सुरक्षा आवश्यक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में वकीलों के लिए व्यापक स्वास्थ्य और चिकित्सा बीमा योजना (Comprehensive Medical Insurance) को अनिवार्य करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों में वकीलों की आर्थिक सुरक्षा आवश्यक है।
-
- यह निर्णय वकीलों को बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करेगा।मुख्य बिंदु:पीठ: न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला।
- सुओ मोटो PIL: वकीलों के इलाज के लिए आर्थिक तंगी के मामले सामने आने के बाद कोर्ट ने स्वयं मामला दर्ज किया।उद्देश्य: उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए एक संरचित (structured) बीमा योजना तैयार करना।
- सहयोग: वरिष्ठ अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह को योजना की रूपरेखा तैयार करने में सहयोग के लिए नियुक्त किया गया।
- अवरोध: इससे पहले, राज्य सरकार को सरकारी पैनल वकीलों के लिए बीमा योजना पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, जिस पर अमल नहीं होने से कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया।
- यह फैसला उत्तर प्रदेश में कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल है।
केस टाइटल - आलोक कुमार मिश्रा @ आलोक कुमार मिश्रा बनाम भारत संघ के माध्यम से सचिव, विधि एवं न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली और अन्य





