मध्य प्रदेश
देवास पटाखा ब्लास्ट कांड में सबसे बड़ी कार्रवाई : हादसों के बाद सरकार क्यों जागी...!
sunil paliwal-Anil Bagora
हादसों के बाद सरकार क्यों जागी...!
प्रशासन की एक बहुत बड़ी लापरवाही उजागर हुई...
देवास. मध्य प्रदेश के देवास में हुए टोंककला पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में पुलिस प्रशासन ने आखिरकार उस मुख्य चेहरे पर शिकंजा कस दिया है, जो इस पूरे अवैध कारोबार को पर्दे के पीछे से संचालित कर रहा था. पुलिस ने मामले की गहराई से जांच करने के बाद फैक्ट्री के कथित असल मालिक और वेयरहाउस किराए पर लेकर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण करने वाले दिल्ली निवासी मुकेश विज के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है.
पुलिस ने मुकेश विज को इस हाईप्रोफाइल मामले में पांचवां आरोपी बनाया है. आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने और उसे सलाखों के पीछे भेजने के लिए पुलिस की विशेष टीमें दिल्ली और अन्य संभावित ठिकानों के लिए रवाना कर दी गई हैं. इस भीषण पटाखा विस्फोट कांड में पहले ही नामजद किए गए चार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा चुकी है.
रासुका के तहत जिला जेल से सीधे उज्जैन की केंद्रीय जेल भेरूगढ़ भेजे गए, मुख्य लाइसेंसधारी अनिल मालवीय और फैक्ट्री मैनेजर आज़ास खान की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं. पुलिस ने इन दोनों आरोपियों से बारीकी से पूछताछ करने और मुकेश विज के साथ उनके वित्तीय और व्यावसायिक संबंधों को उजागर करने के लिए न्यायालय से प्रोडक्शन वारंट जारी करवा लिया है.
हादसे के बाद जागा प्रशासन हुआ अलर्ट, तीन और पटाखा फैक्ट्री सील
हालांकि अंतिम रिपोर्ट जांच के बाद ही स्पष्ट होगी. वहीं हादसे के बाद क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया. इंदौर में जांच के बाद तीन पटाखा फैक्ट्री प्रशासन ने सील की हैं. मजदूरों का दावा है कि हादसे के दौरान फैक्ट्री में दो और साथी थे, जिनकी कोई खोज-खबर नहीं लगी है. पुलिस इस एंगल पर एफएसएल की डीएनए विंग की मदद ले रही है.
देवास के टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट के बाद शुक्रवार दिनभर जांच और राहत कार्य जारी रहे. गुरुवार देर रात पुलिस ने स्थल से एक और शव बरामद किया. जिसके बाद मरने वालों की संख्या 6 हो गई. क्षत-विक्षत शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है. वहीं झुलसे 8 मजदूरों का उपचार इंदौर-देवास के अस्पतालों में जारी है. इंदौर में भर्ती चारों मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है.
सरपंच कविता राजेंद्र गौड़ ने तहसीलदार को एक हस्तलिखित शिकायत सौंपी : जो जांच का एक बड़ा विषय
मध्य प्रदेश के देवास में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में प्रशासन की एक बहुत बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. इस दर्दनाक हादसे में पांच लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन अब जो तथ्य सामने आए हैं वे बताते हैं कि इस त्रासदी को रोका जा सकता था. हादसे से ठीक दो महीने पहले, 16 मार्च 2026 को कालमा गांव की सरपंच कविता राजेंद्र गौड़ ने तहसीलदार को एक हस्तलिखित शिकायत सौंपी थी. इस शिकायत में साफ तौर पर आगाह किया गया था कि आबादी क्षेत्र के पास बड़े पैमाने पर अवैध विस्फोटक जमा किया जा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
सरपंच के प्रतिनिधि राजेंद्र गौड़ ने बताया कि आरोपी केवल बारूद का भंडारण ही नहीं कर रहे थे, बल्कि वहां अवैध रूप से पटाखे भी तैयार किए जा रहे थे. इस गतिविधि के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC मांगा गया था, जिसे पंचायत ने ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खारिज कर दिया था. इसके बावजूद, आरोपियों ने जिला प्रशासन के स्तर से अनुमति प्राप्त कर ली, जो जांच का एक बड़ा विषय है.





