ज्योतिषी
शनि जयंती पर 10 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
paliwalwani
बाबूलाल शास्त्री टोक मो. 9413129502
टोक. न्यायाधिपति शनिदेव की जयन्ति, प्रति वर्ष जयेष्ठ मास कीअमावस्या को मनाई जाती हैं, जो इस वर्ष 16 मई 2026 शनिवार को विशेष महासयोग मे मनाई जायेगी. इस के पहले 2016 मे शनिवार को शनि जयन्ति मनाई गई थी.
,मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध सस्थान टोक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इस दिन अमावस्या तिथि सुबह 05.11बजे से अर्द्ध रात्रि बाद 01.34बजे तक रहेगी. भरणी नक्षत्र दोपहर ्बाद 05.30बजेतक उपरांत कृतिका नक्षत्र मेष का चंद्रमा रात्रि 10.46बजे तक उपरांत वृष का शुरू होगा.
सोभाग्य योग सुबह 10.25बजे तक उपरान्त सोभन योग का संयोग रहेगा, जो विशेष फलदायी योग बना रहा है, इस दिन सोभाग्य योग का दुर्लभ सयोग बनने से साढै साती, ढैया, एव शनि महादशा से पिडित जातको लोगों के लिये विशेष शुभ एवं सिद्धि मुहूर्त है. इस दिन वट आमावस्या का संयोग होने से सुहागिन महिलाएं अखंड सोभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री पूजन भी करेगी.
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इस दिन शनिदेव को शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं. यह परंपरा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, जिसके पीछे कई पौराणिक और वैज्ञानिक कारण हैं.
हिन्दू धर्म में शनिदेव को शनिश्चर का देवता माना जाता है, और उन्हें सांटनिश्चर भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है. 'सज्जनों का नेता'. शनिवार को उनकी पूजा करने से भक्तों को विशेष लाभ मिलता है. इस दिन उनकी पूजा से भक्तों को शुभाशीष प्राप्त होता है. शनिदेव को नीले वस्त्र पहनाए जाते हैं और उनका वाहन काला घोड़ा है.
हनुमान जी और शनिदेव की-एक प्राचीन कथा के अनुसार, रावण के पुत्र मेघनाथ ने शनिदेव को युद्ध में पराजित कर घायल कर दिया था. तब हनुमान जी ने उनके शरीर पर सरसों का तेल लगाया, जिससे उन्हें आराम मिला और वे जल्दी ठीक हो गए. तभी से शनिदेव को सरसों का तेल प्रिय माना जाने लगा. शनिदेव का रंग काला है, और सरसों का तेल भी काले रंग का होता है, इसलिए उन्हें यह अर्पित किया जाता है.
सरसों के तेल में कई औषधीय गुण होते हैं. यह रक्त संचार को सुधारता है, जोड़ों के दर्द से राहत देता है, और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है. शनिदेव को 'न्याय के देवता' के रूप में जाना जाता है. माना जाता है कि सरसों का तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं.
शनिदेव को सरसों का तेल कैसे चढ़ाएं
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि शनिवार को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. एक दीपक में सरसों का तेल भरकर जलाएं और उसे शनिदेव की प्रतिमा के सामने रखें. 'ओम शनिदेवाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए सरसों का तेल अर्पित करें. शनिदेव को नीले फूल, काले कपड़े, काले तिल और उड़द की दाल भी अर्पित करें. उनकी आरती गाएं और अपनी मनोकामना व्यक्त करें.
शनिदेव पर शनिवार को तेल चढ़ाने से उनकी मूर्ति चमकदार रहती है. सरसों का तेल जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों कारणों से शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाना महत्वपूर्ण है, जिससे भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है.
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