आमेट
Amet News : अवैध आंनलाईन दवा बिक्री, जनस्वास्थ्य पर उत्पन्न गंभीर ख़तरे को लेकर आमेट एसडीएम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम लिखा ज्ञापन
M. Ajnabee, Kishan paliwal
M. Ajnabee, Kishan paliwal
आमेट. राजसमन्द जिला केमिस्ट एसोसिएशन शाखा आमेट के तत्वावधान में बुधवार को नगर के दवा विक्रेताओ ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम लिखा एक ज्ञापन आमेट एसडीएम को देकर अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री, जनस्वास्थ्य पर उत्पन्न गंभीर खतरे तथा छोटे केमिस्टों के संरक्षण हेतु तत्काल हस्तक्षेप किए जाने की मांग की।
नगर के डां. रामानन्द दाधीच, अनिल मुण्डोत, हेमंत भंडारी, दीपेन, विकास खटोड़, सुरेश, हरीसिंह, लोकेश आदि दवा विक्रेताओ ने दिए ज्ञापन में बताया कि दिनांक 20 मई 2026 को हमने अपनी सभी दवा दुकानें एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के रूप में बंद रखी हैं।
यह कदम लंबे समय से संबंधित प्राधिकरणों से लगातार निवेदन एवं आग्रह करने के बावजूद इंटरनेट के माध्यम से हो रही, अवैध दवा बिक्री पर कोई प्रभावी कार्यवाही न होने के विरोध स्वरूप उठाया गया है। देशभर के लाखों केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं में व्याप्त गहरे असंतोष के कारण, ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) तथा राजस्थान राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर राजसमन्द जिले के समस्त केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने संयुक्त एवं सर्वसम्मति से इस आंदोलन में भाग लिया है।
स्थानीय प्रशासन / शासन को यह ज्ञापन प्रस्तुत कर हम आपका ध्यान जनस्वास्थ्य एवं मरीजों की सुरक्षा से जुड़े अत्यंत गंभीर विषयों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
ज्ञापन में बताया कि बिना किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के घर-घर दवा वितरण तथा अत्यधिक छूट (Deep Discounting) जैसी गतिविधियाँ करोड़ों मरीजों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। साथ ही,ये देशभर के लाखों लाइसेंसधारी छोटे केमिस्ट एवं दवा व्यापारियों के अस्तित्व पर भी सीधा संकट उत्पन्न कर रही हैं।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न ऑनलाइन कंपनियाँ वर्षों से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। वर्ष 2018 में केवल जनमत आमंत्रित करने हेतु जारी अधिसूचना GSR 817 (E) अब अप्रासंगिक एवं निरर्थक हो चुकी है।
इसी प्रकार कोविड महामारी जैसी असाधारण परिस्थिति में जारी GSR 220 (E), जिसकी आवश्यकता केवल आपातकालीन समय में थी। वर्तमान सामान्य परिस्थितियों में आवश्यक नहीं है। किंतु इसका दुरुपयोग विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा अनियंत्रित होम डिलीवरी हेतु किया जा रहा है।
इन समस्त विषयों को समय-समय पर प्रमाण सहित केंद्र सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। किंतु अवैध गतिविधियों को स्वीकार किए जाने के बावजूद कोई ठोस एवं प्रभावी कार्यवाही दृष्टिगोचर नहीं हुई। जनस्वास्थ्य तथा छोटे केमिस्टों एवं दवा व्यापारियों को होने वाली अपूरणीय क्षति को रोकने हेतु अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्यवाही की जाए। बिना वैध एवं सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री एवं होम डिलीवरी पूर्णतः प्रतिबंधित की जाए, GSR 817 (E) एवं GSR 220 (E) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट (Deep Discounting) एवं Predatory Pricing नीति पर रोक लगाई जाए, तथा देशभर के केमिस्ट एवं दवा विक्रेता सदैव स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था एवं औषधि आपूर्ति तंत्र की मजबूत रीढ़ रहे हैं। कोविड महामारी जैसे कठिन समय में भी दवा व्यापारियों ने पूरे देश में निर्बाध दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि जनहित, जनस्वास्थ्य एवं मरीजों की सुरक्षा के व्यापक हित में उपर्युक्त विषयों पर तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें।





