Tuesday, 07 July 2026

राजसमन्द

दिनेश श्रीमाली की पुस्तक-राजसमंद में आज़ादी की अलख : पुस्तक परिचर्चा एवं साहित्य गोष्ठी का सफल आयोजन

paliwalwani
दिनेश श्रीमाली की पुस्तक-राजसमंद में आज़ादी की अलख : पुस्तक परिचर्चा एवं साहित्य गोष्ठी का सफल आयोजन
दिनेश श्रीमाली की पुस्तक-राजसमंद में आज़ादी की अलख : पुस्तक परिचर्चा एवं साहित्य गोष्ठी का सफल आयोजन

राजसमंद. दिनेश श्रीमाली की पुस्तक "राजसमंद में आज़ादी की अलख" का साकेत साहित्य संस्थान और राजस्थान साहित्य अकादमी के तत्वावधान में पुस्तक परिचर्चा एवं साहित्य गोष्ठी का सफल आयोजन मंगलवार सायं सूचना केन्द्र, राजसमंद में साकेत साहित्य संस्थान, राजसमंद एवं राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में "राजसमंद में आज़ादी की अलख" पुस्तक पर एक भव्य परिचर्चा एवं साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता साकेत साहित्य संस्थान की अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में युगधारा संस्थान, उदयपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश तातेड़ उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में पुस्तक के लेखक दिनेश श्रीमाली एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री चतुर जी कोठारी मंच पर विराजमान रहे।

साकेत साहित्य अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने पालीवाल वाणी को बताया कि शिक्षाविद् एवं लेखक दिनेश श्रीमाली द्वारा रचित पुस्तक "राजसमंद में आज़ादी की अलख", राजसमंद अंचल के स्वतंत्रता संग्राम, हल्दीघाटी की वीरता, मेवाड़ के त्याग और बलिदान की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास है। उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पुस्तक में राजसमंद की माटी की गौरव गाथा और "स्वतंत्रता" के नारे को यथार्थ बनाने वाले संकल्पों का सजीव चित्रण किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य है कि प्रत्येक कलमकार अपने क्षेत्र विशेष के बारे में लिखे ,जिससे आने वाली पीढ़ियां इतिहास को सही मायनों में जान सके।

कार्यक्रम के दौरान कई साहित्यकारों ने पुस्तक के साहित्यिक, ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी पक्षों पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि राजसमंद की लहरों में गूँजने वाला त्याग का तराना और हल्दीघाटी की मिट्टी की खुशबू को यह पुस्तक शब्दों में संजोती है। "किले-कंदराओं से उठी अलख की धारा" को लेखक ने जिस संवेदनशीलता से लिखा है, वह आने वाली पीढ़ियों में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव जगाएगी।

इस गोष्ठी में बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं जिले के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं:  वीणा वैष्णव,  प्रकाश तातेड़, चतुर कोठारी, दिनेश श्रीमाली, एडवोकेट ललित साहू, डॉ. संपत लाल रेगर, प्रेमलता चौरड़िया, वन्दना बावेल, डॉ. मनोहर श्रीमाली, नारायण सिंह राव, राजेन्द्र प्रसाद सनाढ्य 'राजन', कमलेश जोशी, राम गोपाल आचार्य, सुखदेव सिंह आशिया, बख्तावर सिंह चुण्डावत, गणपत  चपलोत, डॉ. देवकी नन्दन नन्दवाना, केशव सांचिहर, दिनेश पचौरी, कपिल पालीवाल, संदीप कुमार व्यास, लक्ष्मीनारायण पालीवाल 'सुन्दरचा', कमलेश रेगर, कुमार दिनेश, शिवपाल सिंह चुंडावत, अन्नू राठौड़ 'रुद्रांजलि', नीतू बाफना, हरीश श्रीमाली, मोहनलाल गुर्जर, प्रेमशंकर पालीवाल, किशन कबीरा, चन्द्रशेखर नारलाई आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने एक स्वर में कहा कि यह पुस्तक भावी पीढ़ी तक राजसमंद के वीरों की जानकारी देगी और उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करेगी। कार्यक्रम का संचालन गोष्ठी प्रभारी डॉ संपत रेगर और चंद्रशेखर नारलाई द्वारा किया गया।

अंत में अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। सभी प्रबुद्ध जन ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे जिले के प्रत्येक विद्यालयों और पुस्तकालयों तक पहुँचाने का आग्रह किया।

प्रेषक : अन्नू राठौड़ रुद्रांजली 

जिला मीडिया प्रभारी, साकेत साहित्य संस्थान, राजसमंद

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