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मध्य प्रदेश / रतलाम के एडवोकेट श्री सुरेश डागर की मृत्यु का मामला गरमाया : इंदौर के एडवोकेट ने जबलपुर उच्च न्यायालय में दायर की याचिका

रतलाम के एडवोकेट श्री सुरेश डागर की मृत्यु का मामला गरमाया : इंदौर के एडवोकेट ने जबलपुर उच्च न्यायालय में दायर की याचिका
जगदीश राठौर की रिपोर्ट...✍️ May 04, 2021 11:21 PM IST

           पालीवाल वाणी मीडिया नेटवर्क-जगदीश राठौर की रिपोर्ट

रतलाम : रतलाम के युवा एडवोकेट श्री सुरेश डागर की बाइक पर हुई मृत्यु का मामला गरमा गया है. इंदौर के अधिवक्ता श्री गौरव पांचाल ने ईमेल के माध्यम से माननीय मुख्य न्यायाधीपति महोदय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर कर एडवोकेट श्री सुरेश डागर की मौत चिकित्सा लापरवाही से होने का आरोप लगाया है. 

एडवोकेट श्री सुरेश डागर की मृत्यु के इस मामले में याचिका में इंदौर के हाई कोर्ट एडवोकेट श्री गौरव पांचाल ने रतलाम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ जितेंद्र गुप्ता, कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड, सीएमएचओ डॉ प्रभाकर ननावरे एवं रतलाम आयुष हॉस्पिटल के संचालक डॉ राजेश शर्मा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय की रिट याचिका क्रमांक 8914/2020 मैं पारित आदेश दिनांक 19 अप्रैल 2021 का उल्लंघन करने पर इन सभी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही संस्थित करने का आवेदन प्रस्तुत किया है. आवेदन में कहा गया कि 4 मई 2021 को एडवोकेट श्री सुरेश डागर अपनी मां एवं अपने भाई के साथ बाइक पर इलाज कराने गए थे. करीब 2 घंटे तक काफी प्रयास करने पर भी रतलाम मेडिकल कॉलेज में श्री सुरेश डागर को बेड नहीं मिलने पर वह उपचार के लिए आयुष हॉस्पिटल गए जहां भी उन्हें बेड प्राप्त नहीं हुए यह तीनों अन्य निजी चिकित्सालय मैं उपचार हेतु बाइक से शहर की तरफ लौट रहे थे तभी एडवोकेट श्री सुरेश डागर ने बीच रास्ते में दम तोड़ दिया. आवेदन में कहा गया है कि वर्तमान में चिकित्सा सुविधाओं के अभाव स्वरूप लोग लगातार दम तोड़ रहे हैं, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय स्वयं संज्ञान ले. यदि एडवोकेट श्री सुरेश डागर को उपरोक्त वर्णित दोनों हॉस्पिटल में प्राथमिक उपचार मिल जाता तो वह दम नहीं तोड़ते  . याचिका दायर होने के बाद एक बार फिर शासन और प्रशासन की नाकामी सिद्व हो रही हैं, तमाम दावे जब दफन हो जाते है तब बिना इलाज के लोग दम तोड़ रहे है, वही शासन-प्रशासन मीडिया के समाने बड़े-बड़े दावे कर रहा है कि प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था बेहतर है, अगर व्यवस्था बेहतर होती तो फिर दर्दनाक हादसे प्रदेश में इतने क्यों हो रहे है, यहां एक बड़ा सवाल आज आम जनता पूछ रही हैं.

जबलपुर उच्च न्यायालय

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