मध्यप्रदेश की कथा वाचक अपर्णा मेनारिया गंधेर आश्रम मे पीठाधीश्वर नियुक्त : मेनारिया समाज और भक्तों, ग्रामीणों में छाई खुशी की लहर
चन्द्रशेखर मेहता
प्रतापगढ़. शामगढ़ मध्यप्रदेश की कथा वाचक साध्वी अपर्णा मेनारिया राष्ट्रीय श्रीराम परिवार, वाराणसी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को मीरा पीठ गंधेर प्रतापगढ़ का पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया है. कथा वाचक साध्वी जन्म से ही भक्ति की गाथा, कथा, भजन, सत्संग का करते हुए 12 वर्ष की आयु में प्रतापगढ़ कथा के लिए आई थीं.
प्रतापगढ़ से 15 किमी दूर गाव गंधेर में श्री राधाकृष्ण मंदिर स्थापित है, यहां पर मीरा माताजी से उस समय इनको आशीर्वाद प्राप्त हुआ. उस दौरान वे इन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाए जाने हेतु कहा गया. माताजी अपर्णा नागदा को पीठाधीश्वर बनाना चाहती थी. परंतु बाल्यकाल के कारण संभव न हो पाया, लेकिन जैसे ही मीरा माताजी का साकेत वास हुआ. इन्हें पीठाधीश्वर के पद पर प्रतिष्ठित किया गया.
गाव के सभी भक्तों, ग्रामीणों, ने इस अवसर पर अपनी और से बहुत शुभकामनाएं और बधाई दी और गांव मे प्रसन्नता की लहर दौड गई. गांव मे साध्वी का सम्मान किया गया. ये जानकारी मेनारिया समाज के 27 चौखला उपाध्यक्ष, भक्त मंडल के सदस्य निरंजनलाल शर्मा ने दी.
साध्वी अपर्णा मेनारिया को मेनारिया समाज की ओर से अखिल भारतीय मेनारिया समाज के पूर्व उपाध्यक्ष एवं मेनारिया सन्देश के सम्पादक चन्द्रशेखर मेहता ने पगड़ी पहनाकर, उपरणा ओढ़ा कर सम्मानित किया.

मीरा पीठाधीश्वर आश्रम गंधेर
जिला मुख्यालय से 15 कि.मी. दक्षिण में गंधेर गांव स्थित है, गंधेर गांव में लगभग सौ वर्ष पुराना आश्रम है जो "मीरा कुटिया" नाम से एक आध्यात्मिक आश्रम के रूप मे प्रसिद्ध है. यहां भगवान-राधा-कृष्ण, सीताराम, महादेव एवं गुरुजी के मंदिर हैं. 100 वर्ष पूर्व यहा मीरामाताजी 'लाल कुंवर' माताजी नाम से साध्वी हुई. जिनका पीहर मंडावरा सिसोदिया परिवार मे एवं ससुराल ठि. जाजली राठौड़ परिवार में था. वे बाल विधवा हो गये थे.
गांव गंधेर में परिवार में भुवासा, मामी सा. का संबध होने से जाजली-मंडावरा परिवार से निकल कर वो गंधेर में आकर यहा कृष्ण भक्ति में लग गये. पहले गांव में घरों में भजन कीर्तन करते थे. बाद में गांव वालों ने उनका भक्ति-भाब देखकर उनके लिए कुटिया बना कर मंदिर आदि का निर्माण कर दिया. माताजी के भजन व भक्ति के प्रभाव से प्रसिद्धि हो गई.
'हनुमान गढ़ी अयोध्या से एक तपोनिष्ठ-वितरागी गुरु 'रामचरणदासजी महाराज इधर भ्रमण करते हुए आये. माताजी ने उन वृद्धगुरु महाराज को अपना गुरू बनाकर उनकी वृद्ध अवस्था देखते हुए यही रोक लिया और सेवा की. संम्वत 2022 सन 1965 में गुरु महाराज रामचरणदास ब्रह्मलीन हो गए. सन् 2017 ई. में पूज्य माता लालकुवर जी भी भगवान के शरणागत हो गये.


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