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इंदौर

मध्य प्रदेश के चार वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को दो-दो माह की सजा : नियमितीकरण से जुड़े मामले में कोर्ट की अवमानना पड़ी भारी...

📅 24 March 2026, 11:48 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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मध्य प्रदेश के चार वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को दो-दो माह की सजा : नियमितीकरण से जुड़े मामले में कोर्ट की अवमानना पड़ी भारी...
मध्य प्रदेश के चार वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को दो-दो माह की सजा : नियमितीकरण से जुड़े मामले में कोर्ट की अवमानना पड़ी भारी...

प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

इंदौर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सभी अधिकारियों को दो-दो महीने के कारावास की सजा सुनाई है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो-दो माह के कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मो. सुलेमान और आईएएस तरुण राठी के साथ तत्कालीन जॉइंट हेल्थ डायरेक्टर डॉ. डी.के. तिवारी तथा मंदसौर के तत्कालीन सीएमएचओ गोविंद चौहान को सजा दी गई है।

यह आदेश प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के एक वार्डबॉय के नियमितीकरण से जुड़े मामले में पूर्व आदेश का पालन न करने पर सुनाया। अदालत ने माना कि अधिकारियों ने जानबूझकर कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की, जो अवमानना की श्रेणी में आता है।

अवमानना याचिका में प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य), आयुक्त, संयुक्त आयुक्त स्वास्थ्य विभाग और मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी अनुपालन करने में विफल रहे।

सरकारी तंत्र में भी कानून से ऊपर कोई नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना आर. भटनागर ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ संदेश दिया कि न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि सरकारी तंत्र में भी कानून से ऊपर कोई नहीं है।

मामले के मुख्य बिंदु:

  • सजायाफ्ता अधिकारी: प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य), आयुक्त स्वास्थ्य, संयुक्त आयुक्त स्वास्थ्य, और मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)।
  • कारण : स्वास्थ्य विभाग के एक वार्डबॉय के नियमितीकरण से जुड़े हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का पालन न करना, जिसे कोर्ट ने जानबूझकर की गई अवमानना माना।
  • अदालत का रुख: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • महत्व : यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जो बताता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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