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पेंशनर्स के लिए खास सुविधा : चेहरा दिखा कर खुद जमा करे अपना जीवन प्रमाण पत्र, जानिए क्या है ‘फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी’

📅 03 December 2021, 08:19 PM • ✍️ Paliwalwani • ⏱️ 3 मिनट में पढ़ें
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पेंशनर्स के लिए खास सुविधा : चेहरा दिखा कर खुद जमा करे अपना जीवन प्रमाण पत्र, जानिए क्या है ‘फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी’
पेंशनर्स के लिए खास सुविधा : चेहरा दिखा कर खुद जमा करे अपना जीवन प्रमाण पत्र, जानिए क्या है ‘फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी’

नई दिल्ली। अगर आपके घर में कोई पेंशनभोगी है या आप खुद पेंशनर्स हैं तो आपको हर साल बैंक में जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है। इसके लिए आपको खुद बैंक में जाना पड़ता है। लेकिन अब तकनीक के बदलते दौर में पेंशनभोगियों के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिशें हो रही है। इसी कड़ी में अब डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा भी शुरू की गई है। वहीं, सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले दिनों वीडियो कॉल की सुविधा के जरिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। इसी क्रम में सरकार ने अब एक और नया सिस्टम शुरू किया है।

विशिष्ट तकनीक का प्रयोग

सरकार ने पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाणपत्र के एक प्रमाण के रूप में चेहरा पहचानने वाली विशिष्ट तकनीक “Face recognition technology” पेश किया है। गौरतलब है कि सभी पेंशनभोगियों को साल के अंत में अपने जीवित होने का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होता है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर ही उन्हें आगे पेंशन जारी रखी जाती है।

क्या है Face Recognition Technology ?

फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी, बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी का ही एक पार्ट है जो किसी व्यक्ति को उसके चेहरे से उसकी पहचान करने में मदद करता है। लोग इसे बायोमेट्रिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस एप्लीकेशन के रूप में भी पहचानते हैं, जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को उसके आंख के रेटिना, नाक, चेहरे के आकार के हिसाब से पहचाना जाता है। किसी फोटो, वीडियो या रियल टाइम में लोगों की पहचान करने के लिए फेस रिकग्रिनिशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम?

फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी एल्गोरिदम स्केल पर काम करती है, जहां आप चेहरा देखते हैं पहचानते है, लेकिन टेक्नोलॉजी फेस डेटा देखती है। उस डेटा को स्टोर और एक्सेस किया जा सकता है। ये तकनीक डेटा को रीड करके फोन का लॉक खोल देती है। आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन में सिक्योरिटी के लि इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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