Saturday, 24 January 2026

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रेलवे का दावा: किराया तय करने की प्रणाली ‘ट्रेड सीक्रेट’, सार्वजनिक नहीं की जा सकती जानकारी

paliwalwani
रेलवे का दावा: किराया तय करने की प्रणाली ‘ट्रेड सीक्रेट’, सार्वजनिक नहीं की जा सकती जानकारी
रेलवे का दावा: किराया तय करने की प्रणाली ‘ट्रेड सीक्रेट’, सार्वजनिक नहीं की जा सकती जानकारी

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को सूचित किया है कि वह यात्री ट्रेनों के किराए निर्धारित करने का तरीका और सूत्र (फॉर्मूला) सार्वजनिक नहीं कर सकता क्योंकि ये ‘व्यावसायिक राज़’ (ट्रेड सीक्रेट) और बौद्धिक संपदा माने जाते हैं.

रेलवे का यह यह बयान सीआईसी द्वारा खारिज की गई सूचना के अधिकार (आरटीआई) की पूर्व अपील के जवाब में सामने आया है, जिसमें ट्रेन टिकटों के आधार किराए यानी बेस फेयर के कैलकुलेशन और इसे प्रभावित करने वाले अन्य कारकों, जैसे डायनामिक प्राइसिंग, मौसमी बदलाव और तत्काल बुकिंग, खासतौर पर पश्चिम सुपरफास्ट एक्सप्रेस के संदर्भ में, के प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई थी.

जवाब में रेलवे ने आरटीआई अधिनियम के तहत इसकी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया. रेलवे का कहना है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8 में उन सूचनाओं के लिए छूट का प्रावधान है जिन्हें सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यावसायिक राज़ और व्यक्तिगत गोपनीयता जैसी संवेदनशील जानकारी की रक्षा करती हैं.

अपने जवाब में भारतीय रेलवे बोर्ड के मुख्य जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने दावा किया कि किराया यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग होता है.

रेलवे का कहना है कि वे एक तरफ राजस्‍व कमाने एक वाणिज्यिक सुविधा के रूप में काम करते हैं, वहीं दूसरी तरफ देशहित में सामाजिक दायित्वों का निर्वहन भी करता है. ऐसे में किराया बढ़ाने का फॉर्मूला बताने से प्रतिस्पर्धियों को फायदा हो सकता है.

सीपीआईओ ने कहा कि विस्तृत मूल्य निर्धारण प्रणाली का खुलासा जनहित में उचित नहीं है. क्योंकि यदि कोई लाभ होता भी है, तो वह आम आदमी को वितरित/हस्तांतरित कर दिया जाता है, न कि निजी उद्यम की तरह व्यक्तिगत लाभ के लिए रखा जाता है.

इसके बाद आयोग ने उल्लेख किया कि सीपीआईओ ने पहले ही सभी सार्वजनिक करने योग्य जानकारी और रेलवे रेटिंग नीतियों के सामान्य सिद्धांत मुहैया कर दिए थे और उपलब्ध रिकॉर्ड से परे डेटा तैयार करने या उसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है.

रेलवे के जवाब में कोई स्पष्ट खामी न पाते हुए और सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की अनुपस्थिति को देखते हुए सूचना आयुक्त स्वागत दास ने रेखांकित किया कि इस मामले में आगे किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और अपील का निपटारा कर दिया.

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