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मध्य प्रदेश

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें अफवाह, प्रशासन ने कहा—पर्याप्त स्टॉक मौजूद

📅 25 March 2026, 11:36 AM ✍️ Paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें अफवाह, प्रशासन ने कहा—पर्याप्त स्टॉक मौजूद
प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें अफवाह, प्रशासन ने कहा—पर्याप्त स्टॉक मौजूद

मध्यप्रदेश। ईरान-इजराइल तनाव के बीच प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें सामने आई हैं। राजधानी भोपाल के कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई। हालांकि, प्रशासन ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही है।

बुधवार सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ देखी गई। कुछ पंपों पर रात में रिजर्व कोटे के अलावा पेट्रोल खत्म हो गया, जिसके कारण उन्हें अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। पंप संचालकों का कहना है कि टैंकर पहुंचते ही आपूर्ति फिर से शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि पेट्रोल-डीजल की कुल सप्लाई पर्याप्त है।

भोपाल में ढाई से तीन महीने का स्टॉक

भोपाल के फूड कंट्रोलर के अनुसार, शहर में 58.79 लाख किलोलीटर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक उपलब्ध है, जो लगभग ढाई से तीन महीने तक के लिए पर्याप्त है। मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के मुताबिक, करीब 4-5% पंपों पर एडवांस भुगतान की समस्या के कारण अस्थायी कमी देखी जा रही है।

भोपाल में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो से 192 पंपों को प्रतिदिन करीब 12 लाख लीटर डीजल और 9 लाख लीटर पेट्रोल की सप्लाई की जा रही है। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। शहर में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

अन्य शहरों में भी अफवाहों से बढ़ी भीड़

इंदौर, उज्जैन, नीमच, देवास, झाबुआ और आगर-मालवा में भी अफवाहों के चलते लोग पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे कई जगह भीड़ बढ़ गई। कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इंदौर जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि शहर में ईंधन और रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई नियमित रूप से जारी है।

‘ईंधन संकट की खबरें भ्रामक’

पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार, पंप सूखने या ईंधन खत्म होने की खबरें भ्रामक हैं। प्रदेश में कहीं भी वास्तविक संकट नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनियों के नए नियमों के तहत ईंधन लेने से पहले एडवांस भुगतान करना अनिवार्य किया गया है। इसी कारण कुछ पंप संचालकों को अस्थायी वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश में कुल करीब 4200 पेट्रोल पंप हैं, जहां प्रतिवर्ष लगभग 1200 टन पेट्रोल और 1600 टन डीजल की खपत होती है।

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