📅 Monday, 28 September 2026 | 02:15 AM IST
लाइव सेंसेक्स: 73,895.74 ▲ +315.24 (+0.43%) • निफ्टी 50: 23,140.50 ▲ +77.40 (+0.34%) • 🪙 सोना 24K (10g): ₹153,210 • 🥈 चांदी (1kg): ₹242,400 • ☀️ उज्जैन: 23°C (साफ आसमान)
देश-विदेश

Citizenship Amendment Act : CAA को लेकर अमेरिका की आलोचना को भारत ने भ्रामक बता किया ख़ारिज

📅 16 March 2024, 07:53 PM • ✍️ Paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
Citizenship Amendment Act : CAA को लेकर अमेरिका की आलोचना को भारत ने भ्रामक बता किया ख़ारिज
Citizenship Amendment Act : CAA को लेकर अमेरिका की आलोचना को भारत ने भ्रामक बता किया ख़ारिज

नई दिल्ली. भारत ने 15 मार्च को एक तीखी फटकार में कहा की अमेरिकी विदेश विभाग की विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की आलोचना "गलत जानकारी और अनुचित" है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवींद्र जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में भारतीय संविधान के समावेशी प्रावधानों के समर्थन में तर्क दिया और अधिनियम के बारे में किसी भी चिंता को खारिज करते हुए इसे "सराहनीय" बताया।

प्रेसवार्ता में श्री जायसवाल ने कहा की, “सीएए नागरिकता देने के बारे में है, नागरिकता लेने के बारे में नहीं है। यह स्टेटलेसनेस के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है। सीएए के कार्यान्वयन पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के संबंध में, हमारी राय है कि यह गलत, गुमराह करने वाला और अनुचित है।”

अमेरिका Citizenship Amendment Act (CAA) कार्यान्वयन की निगरानी कर रहा है

"हम 11 मार्च को नागरिकता संशोधन अधिनियम की अधिसूचना के बारे में चिंतित हैं," अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने गुरुवार को अपनी दैनिक संवाद के दौरान संवाददाताओं को बताया। "हम इस बात की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा। धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार लोकतांत्रिक सिद्धांतों के मूल हैं," श्री मिलर ने कहा।

इसी के जवाब में, श्री जायसवाल ने कहा: "भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर कोई चिंता का विषय नहीं है। वोट बैंक की राजनीति को किसी सराहनीय पहल के बारे में विचारों को निर्धारित नहीं करना चाहिए। उन लोगों द्वारा उपदेश, जिन्हें भारत की बहुलवादी परंपराओं और विभाजन के बाद के क्षेत्र के इतिहास की सीमित समझ है, सबसे अच्छा प्रयास नहीं किया जाता है।"

मुसलमानों को बाहर रखा गया

सीएए को संसद में 11 दिसंबर 2019 को पारित किया गया था और अगले दिन भारत के राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई थी। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के उद्देश्य से बनाए गए इस कानून का असम और दिल्ली सहित भारत के कई हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। सीएए मुसलमानों को समुदायों की सूची से बाहर करने का कारण नहीं बताता है, लेकिन यह उल्लेख करता है कि "पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान एक विशिष्ट राज्य धर्म का प्रावधान करते हैं।"

यह कानून बाद के चार साल और दो महीनों के दौरान तब तक लागू नहीं हुआ जब तक कि सीएए नियमों को इस सप्ताह 11 मार्च को अधिसूचित नहीं किया गया।

सीएए (CAA) का विवरण दोहराते हुए, श्री जायसवाल ने कहा, "नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीएए) भारत का एक आंतरिक मामला है और यह भारत की समावेशी परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के अनुरूप है। यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित सताए गए अल्पसंख्यकों को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे।

📲

पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

चैनल से जुड़ें →

संबंधित खबरें

सभी देखें →
WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें