उज्जैन
Simhastha 2028: सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण की बड़ी पहल, 900 करोड़ की परियोजना बदलेगी उज्जैन की तस्वीर
Paliwalwani
Simhastha Kumbh Ujjain News: उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं। धार्मिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिप्रा नदी को साफ रखने के लिए कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।
करीब 30 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 40 फीसदी से ज्यादा काम उज्जैन क्षेत्र में पूरा हो चुका है। प्रशासन का दावा है कि सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा नदी में साफ और निरंतर जल प्रवाह सुनिश्चित कर लिया जाएगा।
900 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना
शिप्रा शुद्धिकरण के लिए शुरू की गई इस योजना पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परियोजना के तहत कान्ह नदी के पानी को उज्जैन शहर में प्रवेश से पहले ही दूसरी दिशा में मोड़ा जाएगा, जिससे शिप्रा नदी में प्रदूषित पानी न पहुंचे और जल गुणवत्ता बनी रहे।
इस परियोजना की संरचना इस प्रकार है—
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कुल लंबाई: 30 किलोमीटर
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12 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत सुरंग के रूप में
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18 किलोमीटर हिस्सा कट एंड कवर तकनीक से
इस व्यवस्था से न सिर्फ पानी का सही बहाव बना रहेगा, बल्कि शिप्रा नदी की स्वच्छता भी लंबे समय तक सुनिश्चित होगी।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तेज हुआ काम
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना सिंहस्थ-2028 को केंद्र में रखकर चलाई जा रही है। उज्जैन प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि काम में किसी भी तरह की देरी न हो और तय समयसीमा में इसे पूरा किया जाए।
जिला प्रशासन का कहना है कि परियोजना की नियमित निगरानी की जा रही है और अब तक कार्य की प्रगति संतोषजनक रही है।
आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है शिप्रा
स्थानीय लोगों और संत समाज का कहना है कि शिप्रा नदी उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। सिंहस्थ के अलावा भी सालभर विभिन्न पर्वों और धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा घाटों पर स्नान और आचमन के लिए पहुंचते हैं।
धार्मिक संतों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य दोनों के लिए शिप्रा नदी का स्वच्छ रहना बेहद जरूरी है।
समय पर पूरा होगा प्रोजेक्ट, प्रशासन का दावा
प्रशासन का दावा है कि शिप्रा शुद्धिकरण से जुड़ा यह पूरा प्रोजेक्ट निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद सिंहस्थ-2028 के दौरान शिप्रा नदी में साफ पानी का निरंतर प्रवाह बनाए रखा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।





