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जनता को बड़ा झटका : जनवरी 2022 से रेडीमेड कपड़े और जूते खरीदना होगा महंगा, GST की दरें 12 फीसदी तक बढ़ेंगी!

📅 22 November 2021, 05:16 PM • ✍️ Paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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जनता को बड़ा झटका :  जनवरी 2022 से रेडीमेड कपड़े और जूते खरीदना होगा महंगा, GST की दरें 12 फीसदी तक बढ़ेंगी!
जनता को बड़ा झटका : जनवरी 2022 से रेडीमेड कपड़े और जूते खरीदना होगा महंगा, GST की दरें 12 फीसदी तक बढ़ेंगी!

जनवरी 2022 से रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल और फुटवियर खरीदना महंगा हो जाएगा। सरकार ने रेडीमेड गारमेंट्स, टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे तैयार उत्पादों पर GST दरों को जनवरी 2022 से 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया है।

बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक बार फिर झटका लगा है. पेट्रोल-डीजल और राशन के बाद अब रेडीमेड कपड़े, कपड़ा और जूते भी होंगे महंगे नई दरें जनवरी 2022 से लागू होंगी। दरअसल, सरकार ने रेडीमेड गारमेंट्स, टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे तैयार उत्पादों पर जीएसटी दरों को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया है, जो जनवरी 2022 से लागू होगा। अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने यह जानकारी दी है।

सीबीआईसी ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि जनवरी 2022 से कपड़ों पर  की दर 5 प्रतिशत से 12 प्रतिशत होगी। इसके साथ ही किसी भी कीमत के बने कपड़ों पर जीएसटी की दर भी 12 फीसदी होगी। इससे पहले 1000 रुपये से ज्यादा के कपड़ों पर 5 फीसदी जीएसटी लगता था.

किस कपड़े पर कितना जीएसटी?

अन्य वस्त्रों (बुने हुए कपड़े, सिंथेटिक यार्न, ढेर के कपड़े, कंबल, टेंट, टेबल क्लॉथ जैसे अन्य वस्त्र) पर जीएसटी की दर भी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी गई है। इसके साथ ही किसी भी कीमत के फुटवियर पर लगने वाली जीएसटी दर को भी घटाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। गौरतलब है कि पहले 1000 रुपये से ऊपर के फुटवियर पर 5 फीसदी की दर से जीएसटी लगता था।

सीएमएआई ने जताई नाराजगी

सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए क्लॉदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) ने कहा है कि परिधानों पर जीएसटी दर बढ़ाने का सरकार का फैसला निराशाजनक है। सीएमएआई के अध्यक्ष राजेश मसंद ने कहा, ‘सीएमएआई और अन्य संघों और व्यापारिक संगठनों ने सरकार और जीएसटी परिषद से जीएसटी दरों में इस बदलाव को लागू नहीं करने की अपील की है। यह कपड़ा और परिधान कारोबार के लिए बेहद निराशाजनक है।

जीएसटी दरों में बढ़ोतरी का भारी दबाव

इस बयान में आगे कहा गया है कि उद्योग पहले से ही कच्चा माल बढ़ाने का दबाव झेल रहा है. इसके साथ ही पैकेजिंग सामग्री और माल ढुलाई में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में जीएसटी दरों में बढ़ोतरी एक और बड़ा झटका है। बाजार जीएसटी दरों में कोई वृद्धि नहीं होने के बावजूद परिधान में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा था। जीएसटी दरों में बढ़ोतरी के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है और इसका असर आम आदमी पर पड़ेगा. क्योंकि 80 फीसदी से ज्यादा परिधान बाजार ऐसे कपड़ों का है जिनकी कीमत 1000 रुपये से भी कम है।

 

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