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इंदौर

Indore City : बदलें-बदलें से नज़र आये ' राहुल बाबा : नेता प्रतिपक्ष के साथ भागीरथपुरा के पीड़ितों ने महसूस किया जड़ाव

📅 19 January 2026, 12:48 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 8 मिनट में पढ़ें
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Indore City : बदलें-बदलें से नज़र आये ' राहुल बाबा : नेता प्रतिपक्ष के साथ भागीरथपुरा के पीड़ितों ने महसूस किया जड़ाव
Indore City : बदलें-बदलें से नज़र आये ' राहुल बाबा : नेता प्रतिपक्ष के साथ भागीरथपुरा के पीड़ितों ने महसूस किया जड़ाव
  • गांधी ने बेहद संयत रखा अपना मिजाज, अपना लहज़ा, किसी उकसावे में नहीं आये 
  • घटना की गंभीरता के अनुकूल रखा अपना व्यवहार, विषय के इर्द-गिर्द रखें अपने ' बोलवचन ' 
  • अपनी भावभंगिमा, वेशभूषा, भाषा के ज़रिए पीड़ित परिवार के बीच सहज व समरस बने रहें 
  • इंदौर प्रवास को राजनीतिक हमलें से दूर रखा, दौरे में राजनीति तलाशने वालों को भी दिया दो टूक जवाब 
  • स्थानीय कांग्रेस के ज़मीनी आंदोलन को भी बल दे गए गांधी, प्रदेश कांग्रेस का भी बड़ा हौसला 
  •  नितिनमोहन शर्मा 

    बदले बदले से नज़र आये वो राहुल बाबा, जो बात बात पर बांह चढ़ा लेते हैं। मामला उनके मिज़ाज के अनुकूल था। यानी सत्ता से उनकी दो दो हाथ की राजनीति के मनोनुकूल। बावजूद वे सयंत व शांत बने रहें। वे किसी भी उकसावे में भी नहीं आये। न वे प्रदेश की मोहन सरकार के ख़िलाफ़ हमलावर हुए, न आंचलिक क्षत्रप भाजपाइयों पर कोई निशाना साधा। वे विषय से रत्तीभर भी भटके नहीं। न विषय की गंभीरता से परे हुए। दौरे में राजनीति तलाशने वालों को भी उन्होंने कोई मौका नहीं दिया। उलटा उन्हें दो टूक जवाब के साथ निराश ही किया कि में हताहतों के दर्द को महसूस करने आया हूं, आपको जो राय बनाना है, बनाये। उनकी साफ़गोई ने ज़हरीले जल से पैदा होने वाली हलचल को थाम दिया। नतीज़तन पीड़ित पक्ष ही नहीं, इंदौर ने भी राहुल बाबा के इस प्रवास से स्वयम का जुड़ाव महसूस किया। उस स्थिति में जब सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेताओं के अलावा किसी अन्य बड़े नेता का घटना से जुड़ाव का अभाव रहा। 

    राहुल गांधी का इंदौर दौरा प्रचारित की जा रहीं खबरों व बनाये जा रहे माहौल से ठीक उलट था। उनका दौरा खामोशी के साथ मुक्कमल जरूर हुआ लेकिन इसी खमोशी ने विरोधी खेमे में शोर मचा दिया। राहुल विरोधी केम्प को भरपूर उम्मीद थी कि अपनी आदत के मुताबिक राहुल इंदौर में भी कोई ' सेल्फ गोल ' कर देंगे या कांग्रेसी ऐसा कुछ कर बैठेंगे कि राहुल के इंदौर प्रवास की घेराबंदी बन जाएगी। लेकिन ऐसी मंशाओं को निराशा हाथ लगीं। राहुल गांधी ने विमानतल से बॉम्बे हॉस्पिटल व बॉम्बे हॉस्पिटल से आपदा प्रभावित भागीरथपुरा तक के दौरे में बेहद कुल अंदाज का मुजाहिरा कराया। वे पूरे दौरे में बेहद सहज, सरल व संयमित नज़र आये। कोई हड़बड़ी नही दिखाईं। जबकि विषय तंत्र व सरकार की नाकामी से हुई 23 लोगों की मौत से जुड़ा था। लेकिन गांधी ने अपने पूरे दौरे से ये साफ कर दिया कि ये ' लाशों पर राजनीति ' का मामला नहीं था। ये हताहतों के साथ उनके दर्द को साझा करने का प्रवास था। 

    राहुल ने अपनी भाषा-भूषा व भावभंगिमा से पीड़ित परिवारों के बीच सहजता बनाये रखी। इसी सादगी के कारण वे उनके बीच पहुचते ही समरस हो गए, जैसे कोई जनसामान्य ही उनके बीच आया हैं। पीड़ित परिवार राहुल को लेकर बेहद असमंजस व उत्सुकता में भी थे। उनकी जिज्ञासा इस बात को लेकर थी कि विपक्ष का सबसे बड़ा नेता और वह भी भाजपा का घनघोर विरोधी आ रहा हैं तो कुछ बड़ा होगा। लेक़िन इस बड़े नेता के बड़प्पन में उन्हें ऐसा कुछ महसूस ही नही होने दिया कि गांधी का ये प्रवास राजनीति से ही प्रेरित हैं। इसका खुलासा स्वयम राहुल गांधी ने ये कहते हुए किया कि में विपक्ष का नेता हु औऱ पीड़ितों के दर्द को बस साझा करने यहां आया हूं। इसी कारण पीड़ित उनसे जुड़ गए और वे सब बेबाक़ी से बोले जिसकी वे स्वयम कल्पना नही कर रहें थे। राहुल ने न भागीरथपुरा न अस्पताल में पीड़ितों से ऐसे प्रश्न किये जो राजनीति से जुड़े हो। 

    राहुल ने अपना व्यवहार घटना की गम्भीरता के अनुकूल रखा। विषय के अनुकूल ही अपने बोलवचन यानी वक्तव्य को रखा। उन्होंने भागीरथपुरा के गंदे जल की आपदा को व्यापक नजरिये से देखा औऱ इसे देश के अर्बन मॉडल से जोड़ा। मोदी सरकार के स्मार्ट सिटी मॉडल पर सवाल करते हुए भी उन्होंने मामले को केवल इंदौर तक सीमित नही रखा। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ इंदौर ही नही, हर बड़े शहर का मामला है जहां न पीने को साफ़ पानी हैं, न साफ आबोहवा। उन्होंने इसी विषय को बार बार दोहराया कि साफ़ पानी और पॉल्यूशन का विषय सरकारों का हैं और सरकारें ही इसमें नाकाम हैं। ये सब कहते हुए भी उन्होंने स्पष्ट किया कि ये राजनीति नही, ये भागीरथपुरा के लोगों का सपोर्ट हैं। हा, उन्होंने इस बात पर बार बार जोर दिया कि इस त्रासदी की कोई तो ज़िम्मेदारी ले, दोषियों को सज़ा दिलाये व पीड़ितों को अच्छा इलाज़ व मुआवजा मुहैय्या कराए। 

     सज्जन से पहले जाना पूरा मामला, कार में पढ़ी जांच रिपोर्ट, फ़िर हुए मुखर 

    राहुल गांधी ने भागीरथपुरा का पूरा मामला वरिष्ठ पार्टी नेता सज्जन सिंह वर्मा से जाना व समझा। वर्मा ने उनके आते ही एक रिपोर्ट आगे की और बताया कि ये वह जांच रिपोर्ट हैं, जो कांग्रेस दल ने मामले पर तैयार की हैं। सज्जनसिंह ने ये भी बताया कि दल का नेतृत्व मेने ही किया था। इसके बाद राहुल ने वर्मा से रिपोर्ट ली और उसे कार में सवार होने के बाद अध्ययन किया। उसके बाद वे इस विषय पर मुखर हुए। राहुल के इस दौरे ने स्थानीय कांग्रेस के ज़मीनी आंदोलन को भी ताकत दी और प्रदेश कांग्रेस का हौसला भी बड़ा दिया। अन्यथा मामला उमंग सिंगार व जीतू पटवारी तक आकर सिमट जाता, जो बाहुबली प्रदेश भाजपा के लिए ' घर की मुर्गी-दाल बराबर ' ही साबित हो रहें थे। राहुल गांधी के दौरे ने इंदौर के ज़हरीले जल कांड में एक बार फ़िर देशव्यापी हलचल मचाई औऱ राष्ट्रीय मीडिया में मुम्बई की भाजपाई जीत के शोर के बावजूद इंदौर का गंदा पानी फ़िर एक बार सुर्खियां बना।

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