Monday, 20 April 2026

इंदौर

भगवान परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया : जन्मस्थली जानापाव पहुंचे मुख्यमंत्री

sunil paliwal-Anil Bagora
भगवान परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया : जन्मस्थली जानापाव पहुंचे मुख्यमंत्री
भगवान परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया : जन्मस्थली जानापाव पहुंचे मुख्यमंत्री

sunil paliwal-Anil Bagora

जानापाव.

भगवान श्री परशुराम जी की जयंती के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव आज उनकी जन्मस्थली जानापाव पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अपने विचार भी साझा किए और भगवान परशुराम जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान परशुराम जी का जीवन आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति का गौरव है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से धर्म की रक्षा, अन्याय के खिलाफ संघर्ष और समाज में संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

सीएम मोहन यादव ने इस अवसर पर जानापाव तीर्थ के समग्र विकास का ऐलान करते हुए बताया कि राज्य सरकार इस पवित्र स्थल को भव्य स्वरूप देने के लिए ₹17.50 करोड़ की लागत से विकास कार्य करा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत यहां आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, पर्यटकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं और पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य जानापाव को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे यह तीर्थ न केवल देश बल्कि विश्व पटल पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और इसमें गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए भगवान परशुराम जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता, न्याय और धर्म के प्रति आस्था बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम जी के जयकारे लगाए और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। परशुराम जयंती का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सांस्कृतिक एकता और विकास के संकल्प का भी संदेश देता नजर आया।

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