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भोपाल

श्री रामसंस्कृत महाविद्यालय के छात्र भोपाल में हुए पुरुस्कृत

📅 11 January 2024, 01:37 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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श्री रामसंस्कृत महाविद्यालय के छात्र भोपाल में हुए पुरुस्कृत
श्री रामसंस्कृत महाविद्यालय के छात्र भोपाल में हुए पुरुस्कृत

चित्रकूट :

महर्षि पतञ्जलि संस्कृत संस्थान  के तत्त्वावधान में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर भोपाल में आयोजित मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय शास्त्रीय स्पर्धा 2024 में श्री राम संस्कृत महाविद्यालय अंतर्गत श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट (बड़ी गुफा) जानकी कुंड के चार छात्रों ने विभिन्न शास्त्रीय प्रतियोगिता में अव्वल स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं संस्थान का मानवर्धन किया.

जिनमें छात्र विमल कुमार (कक्षा 12 वीं) ने अक्षर श्लोकीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान. छात्र बलराम अग्निहोत्री (12वीं) ने अमरकोषकण्ठ पाठ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान. छात्र अंकित द्विवेदी (12वीं) ने गीता श्लोककण्ठ पाठ प्रतियोगिता. छात्र हिमांशु त्रिपाठी (11वीं) धातुकण्ठपाठ श्लोक प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया.

इस अवसर पर शिक्षा समिति की अध्यक्ष उषा जैन एवं संस्था के निदेशक डॉ बी के जैन ने सभी छात्रों को उनकी विशिष्ट उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई प्रेषित की तथा विद्यालय के समस्त आचार्यों एवं प्राचार्य सुरेन्द्र तिवारी को उनके कुशल मार्गदर्शन हेतु समस्त सदगुरु परिवार की ओर से कोटिशः शुभकामनाएं प्रदान की।

श्रीमती जैन ने बतलाया कि उन्हें प्रसन्नता है कि परम पूज्य गुरुदेव श्री रणछोड़दास जी महाराज द्वारा हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के उद्देश्य से वर्ष 1953 में इस संस्कृत विद्यालय की स्थापना की गई, और तब से वर्तमान तक अनेकों धर्माचार्य इस विद्यालय से पढ़कर धर्म और अध्यात्म जगत में लोककल्याण के कार्य कर रहे हैं।

इन विद्यार्थियों ने भोपाल में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के शताधिक संस्कृत विद्यालय के छात्रों के मध्य जाकर प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया इसका श्रेय गुरुदेव की प्रेरणा तथा आशीर्वाद एवं इन सभी के अथाह परिश्रम को जाता है। इन छात्रों ने विद्यालय, संस्था के साथ साथ समस्त चित्रकूट अंचल के नाम रोशन किया इसकी मुझे प्रसन्नता है।

उल्लेखनीय है कि श्री रामसंस्कृत महाविद्यालय अंचल के प्राचीनतम संस्कृत संस्थान एवं शिक्षण के केंद्रों में से एक है जिसमें 400 से अधिक छात्र देववाणी संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं।

virendra shukla karwi

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