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मध्य प्रदेश

आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज : हाई कोर्ट

📅 13 November 2024, 01:56 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज : हाई कोर्ट
आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज : हाई कोर्ट

जबलपुर. (जेएनएन) मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस आहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आधारकार्ड आयु नहीं बल्कि पहचान का दस्तावेज है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने की व्यवस्था दे दी।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में अवगत करा दें। यह मामला नरसिंहपुर अंतर्गत सिंहपुर पंचायत निवासी सुनीता बाई साहू की याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके पति मोहनलाल साहू की करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। लिहाजा, शासकीय योजना अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया गया था।

किंतु वह आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि दिवंगत पति की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। जबकि आधार कार्ड में दर्ज आयु के अनुसार मृत्यु के समय पति की आयु 64 वर्ष से कम थी। राज्य शासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि जनपद पंचायत ने संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पाया था कि मृतक की आयु 64 वर्ष से अधिक थी। इसके अलावा 2023 में जारी एक परिपत्र में भी यह साफ किया गया था कि आधार कार्ड का उपयोग पहचान के लिए किया जाना चाहिए न कि जन्मतिथि सत्यापन के लिए।

ऐसा इसलिए क्योंकि वह जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र नहीं है। मप्र हाई कोर्ट सहित देश के अन्य हाई कोर्ट भी अपने पूर्व आदेशों में यह रेखांकित कर चुके हैं कि आधार कार्ड पहचान पत्र है न कि जन्मतिथि का प्रमाण पत्र।

चेक-कैंट बोर्ड वार्षिक वेतनवृद्धि के लाभ पर निर्णय ले : हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कैंट बोर्ड, जबलपुर को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मी को वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने पर निर्णय लें। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर कैंट सीईओ को फ्रेश अभ्यावेदन प्रस्तुत करने कहा।

कोर्ट ने सीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन पर विचार कर 30 दिन के भीतर उचित निर्णय पारित करें। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता सुरेश कुमार डुमार की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी व मौसम पासी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता कैंट बोर्ड में सफाई कर्मचारी के रूप में पदस्थ है।

याचिकाकर्ता 2001 से वार्षिक वेतनवृद्धि पाने का हकदार है। याचिकाकर्ता को उत्कृष्ट कर्मचारी का अवार्ड भी मिला है। इस संबंध में कैंट बोर्ड में अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो याचिका दायर की गई।

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