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इंदौर / पालीवाल समाज का राजू फरिस्ता बनकर लगा रहा दौड...

पालीवाल समाज का राजू फरिस्ता बनकर लगा रहा दौड...
Anil Bagora-Pulakit Purohit April 30, 2020 09:13 PM IST

इंदौर। (सुनील पालीवाल की कलम से...) पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर वरिष्ठ समाजसेवी ब्रह्मलीन श्री शंकरलाल जी जोशी (नेगडिया) के सुपुत्र श्री राजू जोशी समाजसेवी होकर निस्वार्थ रूप से अपना धर्म निभा रहे है। कोरोना संक्रमण वायरस कोविड-19 से विश्वव्यापी प्रांत जंग लड़ रहे है, भारत भी इस महामारी बीमारी से त्रस्त है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों को लॉकडाउन का पालन करने का संदेश मीडिया के माध्यम से भेंज रहे है और बता रहे है कि लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग पालन करना जीवन के लिए कितना जरूरी है। वैसा ही संदेश लेकर हमारे समाज के समाजसेवी और भाजपा नेता श्री राजू जोशी फरिस्ता बनकर अंजान लोगों के लिए मदद करने के लिए दौड़ लगा रहे है। श्री राजू जोशी को इतना भी नहीं मालूम है कि वो आखिर किसके लिए दौड़ लगा रहे है। 

● घर पर ठीक से आराम भी नहीं कर पा रहे...

कोरोना संक्रमण वायरस महामारी में हमारे समाज के कई लोग चपेट में आ चुके है। उनके परिवार के लिए देवदुत बनकर सेवा प्रदान कर रहे है। वही अनगिनत लोगों के फोन दिन-भर में इतने आ रहे है कि उनकी समस्याओं को निराकरण करना और जरूरमंदों को खाने के पैकेट भेजना हो या सूखा राशन पहुंचना हो उनके लिए दिनचर्या बन गई। बहुमुश्किल घर पर दो से तीन घंटे ही आराम कर पा रहे है, भोर से लेकर देर रात तक फोन की घंटियों का शोर सुनाई देता है। फिर भी चेहरे पर मुस्कान दिखाई देती है, हर आने वाले फोन पर एक ही बात होती है कि आपके पास राशन पहुंच जाएगा...एक दो घंटे बाद मदद मांगने वाले से भी पुछ लेते है, राशन पहुंच गया। 

● भाजपा में अपनी अलग पहचान स्थापित

भाजपा में अपनी जबरदस्त पकड़ बना रखी है। ताई-भाई हो या फिर सासंद शंकर लालवानी हो या फिर इंदौर के क्षेत्रिय विधायक हो...एक फोन करने पर राजू से पूछ लेते है, क्या हुआ...राजू जोशी अपनी बात रखता और उधर से आवाज आ जाती है। हो जाएगा काम...चिंता मत करो...समाज के लोग भी राजू जोशी के पास दौड़े चले आते है कि उनका काम राजू जोशी कर देगा...राजू भाई भी कभी किसी को निराश नहीं करते...अभी हालही में कोरोना संक्रमण बीमारी से जूझ रहे... समाज के लोगों से निरंतर संपर्क बनाएं हुए है... उनकी जितनी मदद कर सकते है...कर रहे है... नेताओं का फोन लगाते है, प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर... कहते है कि हमारे समाज का व्यक्ति है... जितना संभव हो सके उतना बेहतर इलाज किया जाए...दुख के समय में भी अपनी सेवा से सबको प्रभावित किया...कठिन समय में हॉस्पिताल से सीधे मुक्तिधाम तक की व्यवस्था करना... अपने आप में सराहनीय कार्य है। 

● सेवा करने का अनोखा अंदाज

श्री राजू जोशी को सेवा करने का अपना अलग अंदाज होता है। एक बार सेवा करने की आदत पड़ जाती है तो फिर छूटती ही नहीं। जैसे कि हम बचपन से सुना या पढ़ा करते हैं कि सेवा सभी धर्मों का मूलमंत्र है। अगर हम सेवा नहीं कर सकते तो हमारा यह मानव जीवन निरर्थक है। सेवा भाव के जरिए हम समाज को नई दिशा दे सकते हैं। वो काम भी श्री राजू जोशी कर रहे है। असल में हमारा सेवा भाव ही हमारे जीवन में कामयाबी की असल नींव रखता है। सेवा भाव को अपने हृदय के भीतर विकसित करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। सामाजिक स्तर पर भी सभी को इस ओर लगातार प्रयास करने चाहिए, जिससे देश व समाज का भला हो सके। दूसरों के प्रति निःस्वार्थ सेवा का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी का मूलमंत्र है। निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा से किसी का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का भाव निहित रखना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हुए कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सकें। सेवारत व्यक्ति सर्वप्रथम अपने, फिर अपने सहकर्मियों व अपने सेवायोजक के प्रति ईमानदार हो। इन स्तरों पर सेवा भाव में आई कमी मनुष्य को धीरे-धीरे पतन की ओर ले जाती है। सेवा भाव ही राजू जोशी जैसे व्यक्ति की पहचान बनाती है और उसकी मेहनत चमकाती है। 

● गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं...खुशबु ही काफी

श्री राजू जोशी के लिए सेवाभाव हमारे लिए आत्मसंतोष का वाहक ही नहीं बनता बल्कि संपर्क में आने वाले लोगों के बीच भी अच्छाई के संदेश को स्वतः उजागर करते हुए समाज को नई दिशा व दशा देने का काम करता है। जैसे गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं होती, वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है। ठीक इसी तरह खूबसूरत लोग हमेशा दयावान नहीं होते, लेकिन दयावान लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं यह सर्वविदित है। सामाजिक, आर्थिक सभी रूपों में सेवा भाव की अपनी अलग-अलग महत्ता है। बिना सेवा भाव के किसी भी पुनीत कार्य को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता। 

● अपनों के साथ...निरंतर दुसरों की चिंता करना

सेवा भाव के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के साथ ही आम लोगों को भी उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। असल में सेवा भाव आपसी सद्भाव का वाहक बनता है। जब हम एक-दूसरे के प्रति सेवा भाव रखते हैं तब आपसी द्वेष की भावना स्वतः समाप्त हो जाती है और हम सभी मिलकर कामयाबी के पथ पर अग्रसर होते हैं। सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं है, जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हमारे अंतिम सेवा काल तक सेवा ही एक मात्र ऐसा आभूषण है, जो हमारे जीवन को सार्थक सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। बिना सेवा भाव विकसित किए मनुष्य जीवन को सफल नहीं बना सकता। हम सभी को चाहिए कि सेवा के इस महत्व को समझें व दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें। आज जिस प्रकार श्री राजू जोशी निरंतर दुसरों की सेवा कर रहे है...अपनों की चिंता कर रहे...लोगों को समझा भी रहे है कि घर में रहो...सुरक्षित रहो...नहीं मनाने पर कभी-कभी गुस्सा भी हो जाते है, लेकिन अधिकतर बार तो उनके चेहरे पर मुस्कान ही बनी रहती है। कोरोना महामारी के दौरान समाज में दिवंगत आत्मा को चिर शांति और श्रद्वाजंलि अर्पित कर उनके परिजनों, अनुयायियों और प्रशंसकों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना भी कर रहे है।  

“चुभने“ लगो जब...जमाने की नजर में...!

तो समझ लो, तुम्हारी“चमक“ और बढ़ गई इस जमाने में...!!

● पालीवाल वाणी ब्यूरों-Anil Bagora-Pulakit Purohit...✍️

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● एक पेड़...एक बेटी...बचाने का संकल्प लिजिए...

● नई सोच... नई शुरूआत... पालीवाल वाणी के साथ...

!! कोरोना से डरे नहीं...डटकर मुकाबला कीजिए...जीत हर कदम...देशवासियों की होगी...!!

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