Tuesday, 13 January 2026

इंदौर

मुफ्त में मौत बांटता इंदौर शहर... !

राकेश अचल
मुफ्त में मौत बांटता इंदौर शहर... !
मुफ्त में मौत बांटता इंदौर शहर... !

इंदौर. हर साल देश में स्वच्छता के मामले में  अव्वल रहने वाले मप्र के सबसे बडे शहर इंदौर की हकीकत भागीरथपुरा के उन 8 लोगों ने अपनी जान देकर खोल दी जो इंदौर को मप्र का स्वर्ग समझते थे.इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत हो गई है।

135 से ज्यादा बीमार लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इंदौर के भागीरथपुरा में शौचालय के नीचे मेन लाइन में लीकेज मिला। इसी से दूषित पानी, पेयजल की पाइपलाइन में मिलने की आशंका है। जिला प्रशासन ने 3 लोगों की मौत की ही पुष्टि की है। लेकिन संख्या से मामले की गंभीरता से कोई फर्क नहीं पडता. दूषित पानी से एक मरे या दस, बात तो मरने की है

 शर्म प्रूफ लोग हैं. शर्म तो शर्मदार को आती है. शर्म तो पानी है, जो अपने आप बहने लगता है...

हम जितना गर्व इंदौर के साल दर साल स्वच्छता में प्रथम आने पर करते थे उतनी ही शर्म हमें आज पांच निर्दोष इंदौरवासियों की मौत पर आ रही है. ये शर्म आना तो मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को चाहिए थी. लेकिन उन्हे शर्म आ नहीं सकती. वे शर्म प्रूफ लोग हैं. शर्म तो शर्मदार को आती है. शर्म तो पानी है, जो अपने आप बहने लगता है.

स्वास्थ्य विभाग  ने बता दिया है कि  मौत  का काण डायरिया है जो साफ पानी पीने से कभी नहीं होता.मामले में संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देर रात जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (पीएचई) योगेश जोशी को निलंबित कर दिया है। प्रभारी डिप्टी इंजीनियर (पीएचई) शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त कर दी गई है।

मौत की इससे बडी सजा सरकार दे भी नहीं सकती. सरकार मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर अपने पाप धो लेती है इसीलिए सीएम ने मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा भी की है।सरकार नींद से जागी है सो आनन-फानन में तीन सदस्यों की जांच समिति बनाई गई है। इसके अध्यक्ष आईएएस नवजीवन पंवार होंगे। समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है। 

भागीरथपुरा में चौकी से लगे शौचालय के नीचे मेन लाइन में लीकेज न होता तो मुमकिन है कि लोग न मारे जाते.आशंका है कि इस लीकेज से ही दूषित पानी, पेयजल की पाइपलाइन में मिला होगा। भागीरथपुरा से पानी के 70 से ज्यादा सैंपल लिए हैं। सभी मरीजों का इलाज सरकार के खर्च पर हो रहा है,जिन लोगों ने इलाज के लिए पहले से पैसे जमा किए हैं, उन्हें रिफंड कराया जाएगा।

  • महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि - घटना के लिए जो भी जिम्मेदार होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आर्थात वे इस हादसे के लि खुद को नैतिक या अनैतिक रूप से जिम्मेदार नहीं मानते. उन्होने तो इलाके में 50 टैंकरों से पानी की सप्लाई शुर करा दी है.

भागीरथपुरा निवासी नंदलाल पाल ने मंगलवार सुबह वर्मा नर्सिंग होम में दम तोड़ा। उनको 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। सरकार और इंदौर को कागजी फूलों से सजाकर हर साल अव्वल आने वाली नौकशाही को पाप विमोचित करने का अभियान भी आरंभ हो गया है. डॉक्टरों ने उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट को बताया।

कहा- मेडिकल हिस्ट्री में सामने आया है कि नंदलाल को ब्लड प्रेशर की समस्या थी और वे नियमित दवा नहीं लेते थे। कार्डियक अरेस्ट की आशंका इसी वजह से बनी। लेकिन परिजन का दावा है कि दूषित पानी पीने के बाद ही उनकी हालत बिगड़ी, जान गंवाने वाली महिलाओं के परिजन का कहना है कि पानी पीने के बाद अचानक तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। मुमकिन है कि वे झूठ बोलकर सरकार को बदनाम कर रहीं हैं या विपक्ष ने उन्हे बरगला दिया होगा.

भागीरथपुरा में पानी की जर्जर पाइप लाइन के बारे में सब जानते थे.नई पाइप लाइन के लिए अगस्त 2025 में टेंडर जारी हुआ था, लेकिन इसे अब तक नहीं खोला गया था। करीब 2.40 करोड़ रुपए की लागत से नई पाइप लाइन डाली जानी थी। दस्तावेजों में गंदे और दूषित पानी की शिकायतों का उल्लेख भी था। इसके बावजूद अफसरों ने प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। अब मौतों के बाद टेंडर खोला गया है।यानि ये मौत के बाद का टेंडर है.

  • आपको बता दें कि इंदौर इंदौर स्वच्छ सर्वेक्षण  में लगातार 8 बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है। यह उपलब्धि 2017 से शुरू हुई है और 2024-25 तक जारी रही।2023 में सातवीं बार  साल सूरत के साथ इंदौर संयुक्त प्रथम  रहा.
  • 2024-25: आठवीं बार सुपर स्वच्छ लीग कैटेगरी में प्रथम, सूरत दूसरा और नवी मुंबई तीसरा रहा. जाहिर है कि इंदौर की नौकरशाही के हाथ वो फार्मूला लग गया है जिससे शहर की तमाम खामियों पर पर्दा डालकर प्रथम आया जा सकता है.लेकिन इंदौर भी प्रदेश के दूसरे शहरों की तरह नर्क बन गया है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस नर्क पर कागजी फूलों का बागीचा लगा दिया गया है.

@  राकेश अचल

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