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भाजपा के साथ चोट, बागी नेता नारायण चौधरी मेयर बनकर उभरे : चुनाव में समर्थकों ने कर दिया खेला

📅 21 February 2026, 11:50 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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भाजपा के साथ चोट, बागी नेता नारायण चौधरी मेयर बनकर उभरे : चुनाव में समर्थकों ने कर दिया खेला
भाजपा के साथ चोट, बागी नेता नारायण चौधरी मेयर बनकर उभरे : चुनाव में समर्थकों ने कर दिया खेला

महाराष्ट्र.

महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे.

विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं. नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया.

भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से) को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.

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