हाईकोर्ट भी बोला : साफ पानी जनता का हक, हादसे से हुई इंदौर की किरकिरी-दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जिम्मदारी भी तय होगी
इंदौर.
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इंदौर के भागीरथपुरा जलकांड को लेकर सख्त रवैया दिखाया. इस मामले में 4-5 जनहित याचिकाएं लगाई गई हैं. इन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई और साफ शब्दों में कहा कि स्वच्छ पेयजल जनता का मौलिक अधिकार है. इंदौर को तो सबसे साफ-स्वच्छ शहर का गौरव हासिल है, लेकिन दूषित पेयजल की इस घटना ने पूरे भारत में इसकी छवि को नुकसान पहुंचाया.
इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जरूरत पड़ने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जिम्मदारी भी तय होगी. अब इस मामले में 15 जनवरी 2026 को सुनवाई हो है, जिसमें मुख्य सचिव को भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहना होगा.
भागीरथ पूरा मामले में हाई कोर्ट ने 15 जनवरी को चीफ सेक्रेट्री को किया तलब
इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत एवम सैंकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं के सुनवाई के दोरान हाई कोर्ट ने 15 जनवरी को प्रदेश के चीफ सेक्रेट्री को तलब किया है. ये जनहित याचिका एडवोकेट रितेश इनानी एवं पूर्व पार्षद महेश गर्ग एवं प्रमोद द्विवेदी द्वारा एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से डायर की गई है.
2 जानवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सरकार को मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी. इसमें 4 लोगो की इस मामले में मौत होना बताया गया था, जबकि उस दिन भी मौत के आंकड़े अधिक थे. अब यह संख्या और बढ़ चुकी है.
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला एवं जस्टिस आलोक अवस्थी की नियमित डिवीजन बेंच में पहली बार मामले की सुनवाई हुई. एडवोकेट इनानी ने बताया कि इसमें कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 15 जनवरी को मुख्य सचिव को उपस्थित रहने के निर्देश दिए.
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