दिल्ली
महिला आरक्षण बिल : राज्यसभा-लोकसभा से पास हो सकेगा परिसीमन बिल? क्या कहता है आंकड़ों का खेल
paliwalwani
नई दिल्ली. मोदी सरकार ने गुरुवार 16 अप्रैल 2026 गुरुवार को महिला आरक्षण बिल, परिसीमन समेत कुल तीन विधेयक सदन के पटल पर रखे. यह बिल संसद के विशेष सत्र में लाए गए हैं. अगर यह पारित होते हैं, तो इन्हें साल 2029 में लागू कर दिया जाएगा. सरकार का इस बिल को लाने के पीछे मकसद देश की आधी आबादी यानी महिला वर्ग को सदन में 33 प्रतिशत आरक्षण देना है.
ऐसे में संविधान के 131 संशोधन के पास होने को लेकर अनिश्चिता की स्थिति बनती नजर आ रही है. सरकार इसके तहत सदन की सीटों को बढ़ाना चाहती है. यानी कुल संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना चाहती है. इधर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने संघीय अधिकारों की रक्षा की जरूरत का हवाला देते हुए इस विधेयक का विरोध करने का फैसला किया है.
इस समय विपक्ष की स्थिति भी मजबूत नजर आ रही है. विपक्ष के पास इस बिल की मंजूरी को रोकने के लिए काफी संख्या बल है. हालांकि, बुधवार यानी 15 अप्रैल को हुई विपक्ष की बैठक में आपसी सहमति के किसी तरह के संकेत नहीं मिले हैं. विपक्ष इस संशोधन को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रही है.
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि हमने इस विधेयक के विरोध का फैसला किया है. हम महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं. हम इस विधेयक में दिए गए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ हैं. खड़गे के आवास पर हुई बैठक में टीएमसी, डीएमके, वाम दल, जेएमएम, आरजेडी और आप समेत कई विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया था. इसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे थे.
इधर सरकार को अगर इसे पास कराना है तो हर सदन में कम से कम दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत रहेगी. संविधान के आर्टिकल 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराने के लिए शर्त तय की गई है कि इस तरह के विधेयकों को मंजूरी तभी मिलती है, जब दोनों सदनों में विशेष बहुमत हासिल हो. मतलब कुल सदस्य की संख्या के बहुमत का आंकड़ा होना जरूरी है. इसके अलावा सदन में मौजूद सदस्यों का दो तिहाई समर्थन होना भी जरूरी है. साथ ही राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजने से पहले विधानसभाओं में इनकी पुष्टी होना भी जरूरी है.
इस बिल को सबसे पहले लोकसभा में वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा. यानी लोकसभा में वर्तमान में 540 सदस्य हैं. इसे पास करवाने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. वर्तमान में विपक्ष के पास लोकसभा में संख्या 234 है. विपक्ष की चार पार्टियां, जिनमें सपा, टीएमसी और डीएमके के पास कुल मिलाकर 185 सांसद हैं.
विपक्ष का कहना है कि इस प्रस्तावित बिल से उत्तरी राज्यों यानी ज्यादा आबादी वाले राज्यों को सदन में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा. ऐसे में दक्षिण के राज्यों को नुकसान हो सकता है. इधर, राज्यसभा में इन विधेयकों पर चर्चा तभी होगी, जब वो लोकसभा से पास हो जाएंगे.
सरकार के पास महिला आरक्षण विधेयक दो तिहाई बहुमत से पास कराने का संख्या बल नहीं है. अगर सरकार को अन्य दल का समर्थन मिलता है, या कुछ सदस्यों का मतदान के समय अनुपस्थित होने पर विधेयक को जरूरी मतों के साथ पारित किया जा सकता है.





