उत्तर प्रदेश
पक्का तालाब में बदलाव की दस्तक : पुलिस कार्रवाई से लौटी सुरक्षा और सामाजिक विश्वास
paliwalwani
नशे के खिलाफ मुहिम तेज: डासना गेट पुलिस और नागरिकों की संयुक्त पहल
विशेष रिपोर्ट - रविंद्र आर्य
डासना गेट, गाज़ियाबाद
पक्का तालाब क्षेत्र, वार्ड नं. 12, डासना गेट चौकी क्षेत्र, जो कभी सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता था, पिछले कुछ समय से जुआ, शराबखोरी और सूखे नशे जैसी असामाजिक गतिविधियों के कारण बदनाम हो रहा था। लेकिन हाल ही में डासना गेट चौकी और घंटाघर कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
डासना गेट चौकी के पुलिस इंचार्ज यतेंद्र तोमर द्वारा पक्का तालाब क्षेत्र में की गई सख्त कार्रवाई स्थानीय नागरिकों के लिए आश्चर्यजनक और राहत भरी रही। पहली बार बीट स्तर पर प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराते हुए जुआ, शराब और सूखे नशे जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की नियमित गश्त और निगरानी के कारण असामाजिक तत्वों की आवाजाही में लगभग 70% तक कमी आई है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक वातावरण में सकारात्मक सुधार हुआ है।
नागरिकों का कहना है कि अभी पूरी तरह सूखा नशा बिकना बंद नहीं हुआ है। इसी को देखते हुए डासना गेट चौकी प्रभारी यतेंद्र तोमर ने होली के त्योहार के दौरान विशेष निगरानी हेतु पुलिस जीप की व्यवस्था की है, ताकि छोटी होली और रंग के दिन किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।
सहायक पुलिस उपायुक्त (ACP) उपासना सिंह को वार्ड नं. 12 के नागरिकों द्वारा तहरीर दी गई है कि होली के त्योहार पर हुड़दंग, नशे की बिक्री और जुआ खेलना हर वर्ष आम बात हो जाती है। पुलिस पर विश्वास और उसकी सक्रियता को देखते हुए नागरिकों ने यह कदम उठाया है।
पुलिस की सक्रियता केवल पक्का तालाब तक सीमित नहीं रही। इससे पूर्व कल्लू पुरा क्षेत्र में गुप्त अभियान चलाकर सट्टेबाजों को पकड़ना भी जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। घंटाघर कोतवाली थाना और डासना गेट चौकी की संयुक्त टीम तथा वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता को स्थानीय नागरिकों ने स्वयं मौके पर देखा। अवैध सट्टा बाजारों के माध्यम से युवाओं और बच्चों का भविष्य बिगाड़ने वाले तत्वों पर की गई यह कार्रवाई समाज के लिए राहत लेकर आई है।
पहले जहाँ महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग तालाब और पार्क क्षेत्र में जाने से डरते थे, वहीं अब वातावरण में बदलाव महसूस किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का एहसास बढ़ा है, स्वच्छता में सुधार हुआ है और सामाजिक मर्यादा की पुनर्स्थापना होती दिखाई दे रही है। यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक कार्रवाई का परिणाम नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के सहयोग का सशक्त उदाहरण भी है।
वार्ड नं. 12 के स्थानीय नागरिकों और गुप्त शिकायतकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया है, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखा जा सके। नागरिकों का कहना है कि यदि सतत निगरानी और नियमित गश्त जारी रही, तो पक्का तालाब क्षेत्र पुनः अपने पुराने स्वरूप—एक सुरक्षित, स्वच्छ और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र—के रूप में स्थापित हो सकता है।
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम की तहरीर मे यह भी सुझाव दिया है कि तालाब में लगे कंटेनरों को हटाया जाए, जहाँ नशा करना, बेचना और बच्चों के शोषण जैसी दुर्भाग्यपूर्ण गतिविधियों की आशंका रहती है। नगर निगम को अनुरोध पत्र भेजकर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की स्थापना तथा सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन की माँग की गई है, ताकि असामाजिक तत्वों की पुनः वापसी को रोका जा सके। सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक सतर्कता का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
पक्का तालाब क्षेत्र में हालिया पुलिस कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, स्थानीय सहभागिता और सतत निगरानी से किसी भी क्षेत्र को असामाजिक गतिविधियों से मुक्त कराया जा सकता है। यह पहल केवल कानून व्यवस्था की बहाली नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास, सामुदायिक सुरक्षा और नागरिक गरिमा की पुनर्स्थापना की दिशा में एक मजबूत और सराहनीय कदम है।





