Saturday, 18 April 2026

दिल्ली

महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा : मोदी सरकार की हार, विपक्ष बना रोड़ा

paliwalwani
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा : मोदी सरकार की हार, विपक्ष बना रोड़ा
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा : मोदी सरकार की हार, विपक्ष बना रोड़ा

नई दिल्ली. 

131वां संविधान संशोधन विधेयक यानी कि महिला आरक्षण बिल 2026 लोकसभा में पास नहीं हो सका. सदन में लगातार चर्चा करने और वोटिंग की प्रक्रिया पूरी की गई. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के दौरान सदन में मौजूद कुल 489 सांसदों में से 278 वोट पक्ष में पड़े तो 211 वोट विपक्ष या बिल के विरोध में पड़े. नंबरों का आंकड़ा पूरा ना होने की वजह से ये बिल लोकसभा में ही गिर गया.

हालांकि, वोटिंग के फाइनल आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग से अलग रहे. बाद में जारी किए गए डाटा के अनुसार, इस बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. साथ ही इस बिल के साथ सरकार जो दो अन्य बिल लोकसभा में लेकर आई थी उसे वापस ले लिया. साथ ही लोकसभा शनिवार सुबह 11 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया है.

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण देने के लिए जिससे लड़ना पड़े, लड़ेंगे लेकिन उनका हक दिलाकर रहेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष हमेशा हमारे द्वारा लाए गए सभी बिल और कानून का विरोध किया. उन्होंने सभी उन बिल को गिनाए, जिनका विरोध विपक्ष किया गया. हमने  370 हटाया इन्होंने विरोध किया. हमने 370 हटाया इन्होंने विरोध किया. राम मंदिर बनाया इन्होंने विरोध किया. तीन तलाक हटाया इन्होंने विरोध किया. सर्जिकल स्ट्राइक किया इन्होंने विरोध किया.

गृहमंत्री अमित शाह नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस अवसर पर उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का ये विरोध इस बिल के लागू होने से नहीं बल्कि महिला के आरक्षण के विरोध में है. साथ ही उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं वादा करता हूं कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही पूरा होगा.

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए के सामने संख्या बल की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास लोकसभा में आवश्यक दो तिहाई बहुमत नहीं है, जिससे इस अहम संवैधानिक संशोधन बिल को पास कराना विपक्ष के सहयोग या अनुपस्थिति (एब्सटेंशन) पर निर्भर हो गया है. लोकसभा में एनडीए के पास कुल 293 सांसद हैं, जो सदन का करीब 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं.

इसके अलावा कुछ निर्दलीय और छोटे दलों के सदस्य भी हैं, जिनकी भूमिका इस पूरे गणित में निर्णायक बन सकती है. नियमों के अनुसार, किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है. यदि सभी 540 सदस्य उपस्थित रहते हैं, तो यह आंकड़ा 360 तक पहुंच जाता है.

ऐसे में एनडीए को या तो विपक्षी दलों का समर्थन जुटाना होगा या फिर बड़ी संख्या में विपक्षी सांसदों को मतदान से दूर रखना होगा. उदाहरण के तौर पर यदि 30 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहते हैं, तो कुल संख्या घटकर 510 हो जाएगी और दो तिहाई बहुमत 340 रह जाएगा. इसी तरह 60 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर यह आंकड़ा 320 और 90 सांसदों के अनुपस्थित रहने पर 300 तक आ सकता है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बिल को पास कराने के लिए समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) और डीएमके (22 सांसद) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों में से कम से कम दो दलों का समर्थन या उनकी अनुपस्थिति जरूरी होगी. कांग्रेस के पास भी 98 सांसद हैं, जो इस समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

आगे की राह...,

यदि यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं होता है, तो इसे राज्यसभा में पेश ही नहीं किया जाएगा. वहीं राज्यसभा में भी एनडीए के पास 141 सदस्य हैं, जो कुल संख्या का लगभग 58 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 83 सदस्य हैं. यहां भी दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए बीजेडी, वाईएसआरसीपी, बीएसपी और निर्दलीय सांसदों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है.

इसी बीच, ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने राज्य के हितों की रक्षा के मुद्दे पर अपने सांसदों से एकजुट रहने की अपील की है. उन्होंने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया, लेकिन 131वें संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर गंभीर चिंता भी जताई है.

राहुल गांधी ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी को बोला थैंक्यू

महिला आरक्षण विधेयक लाइव: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी से बात कर उनका विशेष आभार व्यक्त किया है. राहुल ने चुनाव की भारी व्यस्तता के बावजूद अहम मौके पर तृणमूल कांग्रेस के 20 से अधिक सांसदों को संसद भेजने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अब स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक मजबूत लहर बन रही है, जो समूचे विपक्ष के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है.

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