ज्येष्ठ माह की अमावस्या का क्या है महत्व : जानिए पौराणिक कथा
ज्येष्ठ माह की अमावस्या हिंदू कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है। साल 2026 में यह 16 मई, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन का धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत गहरा है, क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाते हैं।
ज्योतिष और पुराणों के अनुसार, अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति विशेष होती है। इस दिन विशेष रूप से पितरों का तर्पण करना, दान करना और धार्मिक कर्म करना अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान और व्रत का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ मास की अमावस्या के महत्व को इन तीन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
वट सावित्री व्रत: सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन वट या बरगद वृक्ष की पूजा करती हैं।
सावित्री और सत्यवान की कथा (वट सावित्री)
सबसे प्रचलित कथा माता सावित्री की है। सावित्री ने अपने तप और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। यह घटना ज्येष्ठ अमावस्या को हुई थी। यमराज ने सावित्री की बुद्धि और निष्ठा से प्रसन्न होकर वट वृक्ष के नीचे सत्यवान को पुनर्जीवित किया था। तभी से महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर धागा लपेटती हैं।
शनि देव के जन्म की कथा
दूसरी कथा शनि देव के प्राकट्य से जुड़ी है। सूर्य देव की पत्नी संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थीं, इसलिए उन्होंने अपनी छाया (स्वर्ण) को वहां छोड़ा और स्वयं तपस्या करने चली गईं। छाया और सूर्य देव के मिलन से ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि देव का जन्म हुआ।
जब शनि देव का जन्म हुआ, तो उनके श्याम वर्ण को देखकर सूर्य देव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया, जिससे शनि देव रुष्ट हो गए। बाद में शिव जी के हस्तक्षेप से पिता-पुत्र का संबंध सुधरा और शनि देव को कर्मों के अनुसार फल देने वाले न्यायाधीश का पद मिला।
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● Disclaimer :इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.
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