धर्मशास्त्र

कोर्ट कचहरी के मामलों से चाहिए छुटकारा तो राजस्थान का दिवाक मंदिर में लगाइए अर्जी

paliwalwani
कोर्ट कचहरी के मामलों से चाहिए छुटकारा तो राजस्थान का दिवाक मंदिर में लगाइए अर्जी
कोर्ट कचहरी के मामलों से चाहिए छुटकारा तो राजस्थान का दिवाक मंदिर में लगाइए अर्जी

दुनिया में हर इंसान कभी ना कभी कोर्ट कचहरी के मामलों से दो चार होता है, कई बार कोर्ट कचहरी के मामले सालों साल चलते हैं और इंसान बेबस इसकी प्रक्रिया में पिसता रहता है. इस मामले में राजस्थान के एक खास मंदिर को लेकर लोगों में काफी ज्यादा मान्यता है.

ये मंदिर है राजस्थान का दिवाक मंदिर. सालों से प्रथा चली आ रही है कि लोग यहां कोर्ट कचहरी के मामलों में जीत हासिल करने या छुटकारा पाने की अर्जी लेकर आते हैं और मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए हथकड़ी, जी हां हथकड़ी देवी अर्पित करते हैं, सालों से चली आ रही इस प्रथा के चलते मंदिर में हथकड़ियों का अंबार लगा है.

ये मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के जोलार में स्थित है. ये माता भगवती का मंदिर है जिसे दिवाक मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर के बारे में सालों से मान्यता है कि ऐसा कोई भी इंसान जो किसी कानूनी पचड़े में फंस गया है और परेशान है वो यहां आकर मनोकामना मांगे और मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए हथकड़ी चढ़ाने पर उसे कोर्ट कचहरी के मामलों से छुटकारा मिलता है या उसे मुकदमे में जीत हासिल होती है.

हथकड़ी का चढ़ावा : माता के भक्त फिर मंदिर आते हैं और यहां लगे 200 साल पुराने त्रिशूल पर हथकड़ी या बेड़ियाँ अर्पित करते हैं. कई हथकड़ियां तो 150 साल पुरानी है. इसी वजह से पूरे मंदिर परिसर में लोहे की हथकड़ियों का अंबार लगा है. यहां सुबह शाम हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है.

बताया जाता है कि अक्सर यहां वैसे ही श्रद्धालु आते हैं, जो कानूनी कार्रवाई में फंसे हुए हैं. वे यहां आकर मां को हथकड़ी और बेड़ियां चढ़ाते हैं और मां से कानून कार्रवाई से मुक्ति के लिए आर्जी लगाते हैं. श्रद्धालु उसी त्रिशुल पर हथकड़ी और बेडियां चढ़ाते हैं, श्रद्धालु कहते हैं कि जो भी यहां आया, वह खाली हाथ नहीं लौटा है.

क्यों पड़ी हथकड़ी चढ़ाने की प्रथा : चलिए अब जानते हैं कि मुकदमे से छुटकारा पाने के लिए हथकड़ी ही क्यों चढ़ाई जाती हैं. आस पास के गांव के लोगों की मान्यता है कि जब यहां डाकू हुआ करते थे तो वो अपने गुट के साथ इसी माता के मंदिर में पूजा करने आते थे. यहां आस पास जंगल था, इसलिए पुलिस भी यहां नहीं आ पाती थी.

डाकू माता रानी से मन्नत मांगते : पूजा के दौरान डाकू माता रानी से मन्नत मांगते कि अगर डाका सफल रहा और पुलिस के पकड़ने के बावजूद वो भाग निकलने में सफल रहे, तो अपने हाथ में पहनी हथकड़ी वो माता को अर्पित कर देंगे. डाकुओं के बाद भी यहां लोगों के हथकड़ी चढ़ाने का सिलसिला जारी है.

● Disclaimer : इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.

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