मध्य प्रदेश

भारत में 4.80 लाख सड़क दुर्घटना एवं डेढ़ लाख लोगों की प्रति वर्ष मृत्यु, आइआरएडी ऐप से सड़क दुर्घटनाए रोकेगी पुलिस

Paliwalwani
भारत में 4.80 लाख सड़क दुर्घटना एवं डेढ़ लाख लोगों की प्रति वर्ष मृत्यु, आइआरएडी ऐप से सड़क दुर्घटनाए रोकेगी पुलिस
भारत में 4.80 लाख सड़क दुर्घटना एवं डेढ़ लाख लोगों की प्रति वर्ष मृत्यु, आइआरएडी ऐप से सड़क दुर्घटनाए रोकेगी पुलिस

रतलाम । सड़क दुर्घटनाओ में हो रही वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की एक पहल से आइआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) परियोजना प्रारम्भ की गई है। प्रदेश के सभी जिलों में इसे लागू किया गया है। रतलाम जिले में नोडल अधिकारीअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  सुनील कुमार पाटीदार को बनाया गया है तथा एनआईसी के डी.आई.ओ.  नरेंद्र सिंह चौहान द्वारा इस परियोजना की जिले में ट्रेनिंग की मॉनिटरिंग की जा रही है।

फ़िलहाल सड़क दुर्घटनाओ में भारत देश विश्व में तीसरे स्थान पर है जिसमे सड़क दुर्घटनाये 4.80 लाख एवं मौतों के मामले में पहले स्थान पर डेढ़ लाख प्रतिवर्ष के आसपास है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में सड़क सुरक्षा में सुधार करना है। यह परियोजना डेटा विश्लेषक तकनीक (data analytics technique) के माध्यम से अमल में लाई जाएगी । देश भर में एकत्रित सड़क दुर्घटना डेटा का विश्लेषण करके विभिन्न प्रकार की नीतिया बनायीं जाएगी। भारत सरकार ने परियोजना के विकास, प्रशिक्षण एवम रखरखाव के लिए एनआईसी को नियुक्त किया है तथा सड़क दुर्घटनाओ को कम करने के लिए आईआईटी, मद्रास एनालिटिक्स और नई नीतियाँ तैयार करेगा। आइआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) परियोजना के अंतर्गत इस प्रोग्राम को मोबाइल एप्लीकेशन या वेबएप के द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है। हालाँकि सड़क दुर्घटना को दुर्घटना स्थल पर डाटा रिकॉर्ड करने के लिए केवल मोबाइल ऐप का ही इस्तेमाल करना होगा। 

6 राज्यों में पायलट प्रोसेस

यह परियोजना पायलट प्रोसेस में 6 राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में शुरू की गई है।  वर्तमान में मध्यप्रदेश द्वारा 21 हजार 975 सड़क दुर्घटनाओ को इस प्रोजेक्ट में रिकॉर्ड किया गया है जिससे राज्य का स्थान बाकि राज्यों से टॉप श्रेणी में है एवं रतलाम जिले में कुल 513 सड़क दुर्घटनाओ को ऐप द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। इस परियोजना में पुलिस विभाग के अलावा ट्रांसपोर्ट, हाईवे एवं स्वास्थ विभाग को भी सम्मिलित किया गया है, जिससे भविष्य में कही भी सड़क दुर्घटना होने पर जल्द से जल्द पुलिस विभाग द्वारा कार्यवाही करके दूसरे विभागों को ऐप का द्वारा सूचना मिल जाये एवं घायलों का समय पर ईलाज किया जा सके। 

एनआईसी द्वारा निर्मित इस ऐप में 'वन प्लेटफार्म - मल्टीपल डिपार्टमेंट' का ध्यान रखा है, जिससे ये सभी विभाग एक दूसरे से इसी ऐप के माध्यम से जुड़े रहेंगे और कही भी सड़क दुर्घटना होने पर जल्दी एक्शन ले पाएंगे। फ़िलहाल यह ऐप पुलिस विभाग द्वारा इस्तेमाल करना शुरू हो चुका है। रतलाम जिले में पुलिस विभाग के नोडल अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुनील कुमार पाटीदार को बनाया गया है तथा एनआईसी के डी.आई.ओ.  नरेंद्रसिंह चौहान द्वारा इस परियोजना की जिले में ट्रेनिंग की मॉनिटरिंग की जा रही है। जिले में परियोजना की ट्रेनिंग, तकनिकी परेशानी, संदेह समाशोधन एवं ग्राउंड सपोर्ट के लिए डिस्ट्रिक्ट रोलआउट मैनेजर रोहित भट्ट को नियुक्त किया गया है। समय-समय पर ए.डी.जी.  डी. सी. सागर (पी.टी.आर.आई.) द्वारा जिलों की ऑनलाइन रिव्यु मीटिंग भी की जाती है, जिसमे जिलों के नोडल अधिकारियो से परियोजना सम्बंधित प्रगति एवं भविष्य की कार्य योजना के बारे में जानकारी ली जाती है। 

किस प्रकार कार्य करता है आई आर ए डी ऐप

रोड एक्सीडेंट की जानकारी होते ही निकटम पुलिस स्टेशन से पुलिसकर्मी  घटना स्थल पर पहुंचेगे और कुछ निन्म जानकारियाँ जैसे दुर्घटना एवं रिपोर्टिंग की दिनांक और समय फिर ये ऐप दुर्घटना के स्थान का longitude और latitude अपने आप ले लेगा। इसके बाद दुर्घटना की गंभीरता, वाहनों की संख्या एवं घायलो की संख्या दर्ज की जाएगी। भविष्य में इस ऐप को स्वास्थ्य विभाग से जोड़ा जायेगा जिसमे पुलिसकर्मी द्वारा दुर्घटना को ऐप में दर्ज करने के बाद निकटतम रोड एक्सीडेंट हॉस्पिटल को अलर्ट मैसेज चला जायेगा और उसके अनुसार हॉस्पिटल में व्यवस्था के साथ घायलों को जल्द से जल्द ईलाज मिल सके।

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