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भारत ने कर दिया कमाल : 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई, दो साल में सबसे तेज रफ्तार
paliwalwani
नई दिल्ली. भारत ने कमाल कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में उसकी ग्रोथ बढ़कर 7.7% हो गई। हालांकि, मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% रही जो एक साल पहले 7.1% थी। यह दो साल में सबसे तेज रफ्तार है।
हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी।
नई जीडीपी सीरीज के तहत जारी हो रहे आंकड़े
भारत अब नई जीडीपी सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
एक नजर में मुख्य आंकड़े
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FY26 रियल GDP ग्रोथ: 7.7%
FY25 रियल GDP ग्रोथ: 7.1%
FY26 नॉमिनल GDP ग्रोथ: 8.9%
Q4 FY26 रियल GDP ग्रोथ: 7.8%
Q4 FY26 नॉमिनल GDP ग्रोथ: 9.1%
FY26 रियल GVA ग्रोथ: 7.9%
FY26 एक्सपोर्ट ग्रोथ: 9.3%
FY26 मशीनरी और इक्विपमेंट इम्पोर्ट ग्रोथ: 19.3%
अनुमानों से बेहतर हैं आंकड़े
यह संशोधित राष्ट्रीय खाता डेटा के तहत दूसरा आंकड़ा है। इसमें आधार वर्ष को अपडेट किया गया है। डेटा के स्रोतों का दायरा बढ़ाया गया है। चौथी तिमाही का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के ब्लूमबर्ग सर्वे में लगाए गए 7.3% के अनुमान से बेहतर रहा।
यह मजबूत ग्रोथ दर ऐसे समय में आई है जब हालात काफी अनिश्चित हैं। अमेरिका की ओर से ऊंचे टैरिफ, ईरान संघर्ष के बाद बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भविष्य के लिए मुख्य जोखिम बनकर उभरी हैं।
इन चुनौतियों से पड़ सकता है असर
आयातित कच्चे तेल और होर्मुज स्ट्रेट से व्यापार प्रवाह पर निर्भरता के कारण भारत मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की रुकावट से विशेष रूप से प्रभावित हो सकता है। भू-राजनीतिक तनाव, अल नीनो से मौसम में संभावित गड़बड़ी, कड़े वित्तीय हालात, बढ़ती महंगाई और कमजोर मॉनसून का जोखिम शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की मांग के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
इनफ्लेशन एडजस्टेड जीडीपी इतनी रही
महंगाई के असर को हटाकर देखी जाने वाली GDP (इनफ्लेशन-एडजस्टेड GDP) चौथी तिमाही में बढ़कर 87.77 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 81.40 लाख करोड़ रुपये थी। नॉमिनल टर्म्स में (जिसमें कीमतों का असर शामिल होता है), GDP 9.1% बढ़कर 94.65 लाख करोड़ रुपये हो गई।
अलग-अलग क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि का पैमाना माने जाने वाले 'सकल मूल्य वर्धन' (GVA) में वास्तविक रूप से (real terms) 7.9% की ग्रोथ हुई। यह तिमाही के दौरान 80.18 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 74.32 लाख करोड़ रुपये था। नॉमिनल GVA 9.9% बढ़कर 86.46 लाख करोड़ रुपये हो गया।
आंकड़ों पर एक्सपर्ट की राय
कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा, 'मजबूत प्राइवेट खपत और निवेश की वजह से चौथी तिमाही (4Q) की GDP उम्मीद से बेहतर रही। हालांकि, आगे चलकर जियोपॉलिटिकल और अल-नीनो की वजह से सप्लाई-साइड पर आने वाले झटकों को लेकर हमें सावधानी बरतनी होगी। सख्त फाइनेंशियल हालात, महंगाई और कमजोर मॉनसून का असर शहरी और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। हमें उम्मीद है कि GDP 6-6.3% के दायरे में रहेगी, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि ये जोखिम कैसे सामने आते हैं।'





