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इंदौर

लोक-अदालत में समझौता करने वाले पक्षकारों को अब न्यायालय-फीस वापस प्राप्त करने के लिए शासकीय- कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ते है....!

📅 23 December 2025, 12:58 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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लोक-अदालत में समझौता करने वाले पक्षकारों को अब न्यायालय-फीस वापस प्राप्त करने के लिए शासकीय- कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ते है....!
लोक-अदालत में समझौता करने वाले पक्षकारों को अब न्यायालय-फीस वापस प्राप्त करने के लिए शासकीय- कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ते है....!

इन्दौर.

इन्दौर अभिभाषक संघ इन्दौर के पूर्व-अध्यक्ष गोपाल कचोलिया अभिभाषक ने बताया है कि मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मध्यप्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को एक पत्र के साथ "न्यायालय- शुल्क वापसी हेतु मानक संचालन प्रक्रिया "Standard Operating Procedure  (SOP) प्रेषित की थी।इस प्रक्रिया से न्याय शुल्क वापसी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और शीघ्र हो गई है। अब पक्षकार/उसके अभिभाषक को किसी भी शासकीय-कार्यालय में जाने की आवश्यकता नही है। 

इस नई प्रक्रिया के कारण पक्षकारों के समय और धन की बचत

गौरतलब है कि पहले लोक-अदालत में समझौता करके अपने केस निराकृत करवाने वाले पक्षकार को जिस न्यायालय में राजीनामा या केस वापसी होती थी,उस न्यायालय से न्यायालय-फीस वापस प्राप्त करने के लिए एक प्रमाण पत्र प्राप्त कर पूर्व निर्धारित प्रक्रिया अनुसार आवश्यक दस्तावेजों सहित एक आवेदन पत्र के साथ कलेक्टर कार्यालय में जाकर जमा करवाना पड़ता था। उसके बाद सम्बन्धित विभाग में अनेक-बार चक्कर लगाने के बाद न्यायालय-फीस वापस प्राप्त होती थी।

लेकिन मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस वर्ष दिनांक 01/02/2025 को जारी की गई " न्यायालय शुल्क वापसी हेतु मानक संचालन प्रक्रिया " SOP के लागू होने के बाद पक्षकार/उसके अभिभाषक को किसी शासकीय कार्यालय में जाने की आवश्यकता नही है। पक्षकार/उसके अभिभाषक को केवल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में एक आवेदन पत्र (न्यायालय से प्राप्त न्यायालय- फीस वापसी के प्रमाण पत्र के साथ) प्रस्तुत करना पड़ता है, उसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा न्यायालय शुल्क वापसी के प्रमाणपत्र को एक कवरिंग लेटर के साथ कलेक्टर कार्यालय को प्रेषित किया जाता है।

लेटर में एक माह के भीतर प्रमाण पत्र में उल्लेखित बैंक खाते में न्यायालय शुल्क की धनराशि जमा करवाने का निर्देश लिखा होता है। कवरिंग लेटर की एक प्रति जिला पंजीयक को भी भेजी जाती है। कलेक्टर कार्यालय से आदेश प्राप्त होने पर जिला पंजीयक कार्यालय वेण्डर जारी करता है।

वेण्डर के आधार पर जिला-कोषालय द्वारा सम्बन्धित पक्षकार के बैंक खाते में राशि हस्तांतरित की जाती है। भुगतान की सूचना जिला पंजीयक द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाती है। भुगतान की सूचना प्राप्त होने पर जिला विधिक प्राधिकरण पक्षकार/उसके अभिभाषक से भुगतान प्राप्ति की स्वीकृति प्राप्त करता है।

गोपाल कचोलिया अभिभाषक ने बताया है कि लोक-अदालत में समझौता करने वाले पक्षकार लोक-अदालत सम्पन्न होने के बाद न्यायालय-फीस वापसी के लिए अपने आवेदन पत्र न्यायालय द्वारा जारी किए गए न्यायालय फीस वापसी के प्रमाण पत्र के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जमा करवा कर अपनी धनराशि आसानी से वापस प्राप्त कर सकते है। अब उन्हें किसी शासकीय कार्यालय में चक्कर लगाने की आवश्यकता नही है।

  • गोपाल कचोलिया (अभिभाषक) 9827094681 "पूर्व-अध्यक्ष" इन्दौर अभिभाषक संघ इन्दौर
  • मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की " न्यायालय-शुल्क वापसी हेतु मानक संचालन प्रक्रिया " SOP के कारण अब पक्षकार आसानी से न्यायालय फीस वापस प्राप्त कर सकते है.... 

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