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Jain wani : सारे विश्व की आस्था कुण्डलपुर के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान पर है : पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज

📅 17 March 2026, 10:11 AM ✍️ Jain wani ⏱️ 6 मिनट में पढ़ें
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Jain wani : सारे विश्व की आस्था कुण्डलपुर के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान पर है : पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज
Jain wani : सारे विश्व की आस्था कुण्डलपुर के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान पर है : पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज

सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में श्रंमण संस्कृति के महामहिम प.पू. पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ की हुई भव्य मंगल अगवानी

राजेश जैन दद्दू 

कुण्डलपुर दमोह. सुप्रसिद्ध विश्व धरोहर सिद्धक्षेत्र, जैन तीर्थ कुण्डलपुर की पावन धरा पर समाधीष्ट आचार्य परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रंमण संस्कृति के महामहिम प.पू. चर्या शिरोमणि, पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का 14 मार्च 2026 दिन शनिवार को प्रातः भव्य मंगल प्रवेश हुआ।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी पदाधिकारी, सदस्यों एवं देश के विभिन्न अंचलों से आए गुरु भक्त श्रद्धालु जनों द्वारा समस्त आचार्य संघ की भव्य मंगल अगवानी एवं पाद प्रक्षालन किया गया। इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के ललित सराफ, अशोक सराफ, अजय निरमा, संजय कुबेर, अमर सेठ, अखिलेश फट्टा, पुरुषोत्तम जैन, प्रबंधक मोतीलाल जैन, उपप्रबंधक एन के जैन, रविंद्र जैन, राहुल जैन नोहटा,अनिल पुजारी, आदित्य पुजारी, कुण्डलपुर स्टाफ, कुण्डलपुर जैन समाज, बड़ी संख्या में देश के विभिन्न नगरों से आए श्रद्धालु भक्त, महिला, पुरुष वर्ग, ब्रह्मचारी भैया जी, दीदी जी, हथकरघा पूर्णायु  के भैया जी आदि की उपस्थिति रही। और नमोस्तु शासन जयवंत हो गुंजायमान किया गया।

दद्दू ने बताया कि आचार्य ससंघ सीढ़ियां चढ़कर पर्वत पर स्थित मंदिरों की वंदना करते हुए बड़े बाबा के मंदिर पहुंचकर पूज्य बड़े बाबा के चरणों में पहुचा। जहां भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा संपन्न हुई। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने मुखारबिंद से किया। इस अवसर पर पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने आज आदिनाथ भगवान के चरणों में बैठकर कहा कि कितने महात्मा यहां बैठे हुए हैं ।ये बड़े बाबा कैसे बने बड़ी-बड़ी कषाय छोड़कर , ओहो इतनी विशाल प्रतिमा है तो चट्टान कितनी बड़ी होगी।

यह पूरा पाषाण मंदिर है विशाल मंदिर बन गया पाषाण का। भगवान ऋषभदेव की चरण सन्निधि में हम सब बैठे हुए हैं। ऋषभदेव का अभी एक दिन पहले जन्म कल्याणक था हम आज उनके चरणों में बैठे हुए हैं। यह वही तीर्थंकर है जिनका सूत्र था ,नारा था कृषि करो या ऋषि बनो। भारत के कण-कण में जैनत्व भरा हुआ है । उन लोगों से मिलो जिन्होंने यहां भगवान आदिनाथ को स्थापित किया होगा। सुरेंद्र कीर्ति जी भट्टारक  जी स्वर्ग में मुस्कुरा रहे होंगे और जैसे आचार्य विद्यासागर जी स्वर्ग पहुंचे तो उनसे मिलने आए होंगे।

क्यों मिलने आए होंगे? वे तो कह रहे होंगे मैं तो भगवान आदिनाथ को विराजमान करके आया था छोटे से स्थान पर, पर आपने बड़े बाबा को बड़े स्थान पर स्थापित कर दिया। दोनों मुस्कुरा रहे होंगे। खिलखिला रहे होंगे। आज और मुस्कुरा रहे होंगे कि हमने बड़े बाबा को स्थापित किया, आपने मंदिर बनवा दिया और आज विशुद्धसागर जी आकर भक्ति कर रहे हैं। सारे विश्व की आस्था कुण्डलपुर के भगवान आदिनाथ बड़े बाबा पर है।

आचार्य श्री की आहारचर्या श्रेष्ठी श्री आकाश सेठ, अक्षत सेठ परिवार दमोह के चौके में संपन्न हुई। इस अवसर पर प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धि कलश, करने का सौभाग्य अमन सपना जैन अतुल सिंघई परिवार भोपाल, कैलाश चंद. संतोष, राजेश, शुभम, साक्षी जैन परिवार सोनीपत, उदय सिंह जैन सिद्धार्थ जैन वाराणसी, कैलाशचंद्र हरिश्चंद्र जैन देवेंद्रनगर सहित बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्त जनों को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने समायिक के पश्चात संत निवास में मंगल प्रवचन दिए और आचार्य संघ का विहार गढ़ाकोटा की ओर हो गया। आज का रात्रि विश्राम बेला जी ग्राम में होगा।

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