इंदौर
मध्य प्रदेश में कॉलोनी का भी होगा आधार कार्ड, स्कैन कर पता कर सकेंगे वैध है या अवैध
sunil paliwal-Anil Bagora
इंदौर.
मध्य प्रदेश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी विकसित करने के लिए अब एक समान कानून लागू किया जाएगा। अभी अलग-अलग व्यवस्थाओं की वजह से कई कॉलोनाइजर ग्रामीण सीमा में अवैध कॉलोनियां काट देते है। नए कानून में हर कॉलोनी का यूनिक आईडी नंबर होगा और सिर्फ रजिस्ट्री कराने से मकान वैध नहीं माना जाएगा। नए कानून में पूरे प्रदेश के लिए एक लाइसेंस व्यवस्था, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और कलेक्टरों की जवाबदेही जैसे प्रावधान है।
मध्यप्रदेश सरकार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी विकास की व्यवस्था को एक समान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में कॉलोनियों के विकास और नियमन के लिए एकीकृत कॉलोनाइजर एक्ट 2026 लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
वर्तमान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नियम होने के कारण कई कॉलोनाइजर ग्रामीण सीमाओं में अवैध कॉलोनियां विकसित कर लेते हैं। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
कॉलोनाइजर एक्ट का ड्राफ्ट तैयार
जानकारी केअनुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने एकीकृत कॉलोनाइजर एक्ट 2026 (Unified Colonizers Act 2026) का ड्राफ्ट अंतिम रूप दे दिया है। प्रस्तावित कानून को कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
केवल रजिस्ट्री से मकान या प्लॉट वैध नहीं !
इस नए कानून के तहत प्रदेश की प्रत्येक कॉलोनी को एक यूनिक आईडी नंबर (Unique ID Number) दिया जाएगा। साथ ही केवल रजिस्ट्री होने भर से किसी मकान या प्लॉट को वैध नहीं माना जाएगा। कॉलोनी को निर्धारित नियमों और स्वीकृतियों के अनुरूप विकसित करना अनिवार्य होगा।
ये प्रावधान भी होंगे लागू
प्रस्तावित एकीकृत कॉलोनाइजर एक्ट में पूरे प्रदेश के लिए एक समान लाइसेंस व्यवस्था, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और कलेक्टरों की जवाबदेही तय करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
अवैध कॉलोनाइजर्स के खिलाफ सजा का प्रावधान
सरकार ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नए कानून में सख्त दंड का प्रावधान भी किया है। अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों को 10 वर्ष तक की सजा और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
नए कानून के प्रस्तावित बदलाव
- एक प्रदेश, एक लाइसेंस : कॉलोनाइजरों को हर निकाय से अलग-अलग अनुमति नहीं लेनी होगी। पूरे प्रदेश के लिए एक लाइसेंस सिस्टम होगा, जिससे सरकार राज्य स्तर पर निगरानी कर सकेगी।
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग: हर स्वीकृत कॉलोनी का डिजिटल रिकॉर्ड, नक्शा और डेवलपमेंट स्टेटस ऑनलाइन उपलब्ध होगा। खरीदार घर बैठे देख सकेंगे कि जहां निवेश कर रहे हैं, वह वैध है या नहीं।
- रजिस्ट्री और ले-आउट का लिंक: बिना अनुमोदित ले-आउट वाले प्लॉट की रजिस्ट्री मुश्किल होगी। राजस्व और नगर विकास विभाग का डेटा लिंक किया जाएगा।
- कृषि भूमि का संरक्षण : खेती की जमीन को छोटे टुकड़ों में बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। इसके लिए डायवर्जन और ले-आउट मंजूरी अनिवार्य की जा रही है।
- बुनियादी सुविधाओं की गारंटी : कॉलोनाइजर को सड़क, नाली, बिजली, पानी, सीवर और पार्क विकसित करना अनिवार्य होगा।
कानून लागू करने में किसकी क्या भूमिका
नए कानून को लागू करने और रेगुलेट करने के लिए कई स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जिला कलेक्टर उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उनके पास अवैध कॉलोनियों की जांच, निर्माण/प्लॉटिंग पर रोक लगाने, भूमि रिकॉर्ड की राजस्व जांच, ध्वस्तीकरण की मंजूरी देने और FIR दर्ज कराने के अधिकार होंगे। वे 45 दिन के भीतर कार्रवाई की निगरानी भी करेंगे। कलेक्टर को जिले में "नोडल अथॉरिटी" बनाया जाएगा, ताकि पंचायत और नगर निकायों के बीच समन्वय बना रहे।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) विभाग: ले-आउट की स्वीकृति, मास्टर प्लान की अनुरूपता की जांच, सड़क, पार्क और ओपन स्पेस के मानक तय करने, GIS/डिजिटल मैपिंग और कॉलोनी के लाइसेंस जारी या रद्द करने का कार्य करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की प्लॉटिंग भी TNCP की अनुमति से संबंधित होगी।
नगर निगम आयुक्त: शहरी निकायों को क्षेत्रीय प्रवर्तन के अधिकार दिए जाएंगे। इसमें अवैध निर्माण को सील करना, विकास शुल्क वसूलना, नक्शा अनुमति की जांच करना, कॉलोनी डेवलपर पर जुर्माना लगाना, पानी-सीवर कनेक्शन को रोकना और बुलडोजर कार्रवाई करना शामिल है।
जिला पंचायत/जनपद पंचायत CEO: ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी भूमिका सीमित रहेगी। वे ग्रामीण प्लॉटिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करेंगे, पंचायत क्षेत्र की निगरानी करेंगे और बिना अनुमति वाली कॉलोनी की सूचना कलेक्टर को भेजेंगे। लेकिन अंतिम अनुमति के अधिकार राज्य स्तर या TNCP के पास रहेंगे।
राजस्व विभाग के अधिकारी: SDM, तहसीलदार और नायब तहसीलदार कृषि भूमि डायवर्जन की जांच, अवैध रजिस्ट्री की रिपोर्ट, खसरा/नक्शा सत्यापन, सीमांकन, कब्जा हटाने और भूमि उपयोग उल्लंघन पर कार्रवाई करेंगे।
पंजीयन विभाग: बिना अनुमोदन के प्लॉट की रजिस्ट्री रोकेगा, ऑनलाइन वैधता की जांच करेगा और TCP पोर्टल लिंक की जांच करेगा।
खरीदारों को क्या लाभ होगा ?
फर्जी और अवैध कॉलोनियों से सुरक्षा: कॉलोनियों की ऑनलाइन वैधता की जांच, लाइसेंस का सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था की जाएगी। इससे खरीदार पहले से ही जान सकेगा कि कॉलोनी वैध है या नहीं।
रजिस्ट्री के बाद फंसने का खतरा कम: अभी कई जगह प्लॉट की रजिस्ट्री हो जाती है, लेकिन कॉलोनी की स्वीकृति नहीं होती। नए सिस्टम में रजिस्ट्री को अनुमोदन से जोड़ा जाएगा।
सड़क, पानी, सीवर जैसी सुविधाएं सुनिश्चित होंगी: कॉलोनाइजर के लिए ये सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य होगा, जिससे "सिर्फ प्लॉट बेचकर गायब हो जाने" की समस्या पर रोक लगेगी।
कॉलोनाइजर की जिम्मेदारी तय की जाएगी: गलत जानकारी देने, बिना अनुमति प्लॉट बेचने या सुविधाएं न देने पर भारी जुर्माना, FIR और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है।
कानूनी सुरक्षा में वृद्धि : कॉलोनी का यूनिक आईडी, ऑनलाइन स्वीकृति नंबर, GIS मैपिंग और सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध होने से खरीदार के पास कानूनी सबूत रहेगा।
बैंक लोन प्राप्त करने में आसानी : वर्तमान में अवैध कॉलोनियों में बैंक लोन, होम फाइनेंस और नक्शा मंजूरी में समस्याएं आती हैं। कॉलोनी के नियमित और स्वीकृत होने पर वित्तीय संस्थानों का विश्वास बढ़ेगा।
एक्सपर्ट ने कहा- अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण जरूरी
क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक का कहना है कि कॉलोनाइजर एक्ट 2021 में बदलाव करके नया एक्ट लाया जा रहा है। सरकार ने क्रेडाई के अधिकारियों से सुझाव मांगे थे। हमने अपने सुझाव दिए हैं।
नए एक्ट के तहत कुछ कड़े प्रावधान किए गए हैं, जैसे कि अगर ग्रामीण क्षेत्र में कोई अवैध कॉलोनी बनती है, तो संबंधित पटवारी जिम्मेदार होगा। शहरी क्षेत्रों में जिम्मेदारी वार्ड प्रभारी की होगी।
अभी कॉलोनी बनाने के लिए 11 अलग-अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन प्रस्तावित कानून के अनुसार कॉलोनाइजर को केवल तीन विभागों से ही अनुमति लेनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नए कानून से अवैध कॉलोनियों पर रोक लगेगी।





