इंदौर
श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी, इंदौर के चुनाव में खामोशी पर चर्चा : विकास ही एकमात्र सहारा
Anil Bagora-Sunil Paliwal
अनिल बागोरा-सुनील पालीवाल
इंदौर. श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी, इंदौर के चुनाव 29 मार्च 2026 रविवार को पालीवाल समाज भवन, श्री चारभुजानाथ मंदिर परिसर पर होने जा रहे है. उस दिन समाज को नया मुख्या मिलेगा, वहीं नवीन कार्यकारिणी का निर्वाचन मतदाताओं के द्वारा किया जाएगा.
इस बार चुनावी चौपाल पर खामोशी छाई हुई है, ना चुनाव की चर्चा है, और ना ही कौन जीतेगा और कौन हारेगा...उसके बारे भी कायस लगाना तो दुर... उस पर बात भी नहीं की जा रही है, हमारे समाज में चुनाव हैं. जहां दोनों दलों के प्रत्याक्षी घर-घर दस्तक दे रहे. मतदाता भी चतुर खिलाड़ी बनकर द्ववार पर आने सभी समाजजनों का अभिवंदन कर रहे है, और मीठ्ी मुस्कान से दोनो का मान-सम्मान करते हुए बोल रहे है, भाई साहब आपका ही ध्यान रखेगें, लेकिन मतदाताओ को एक ही चयन करना है. पदाधिकारियों में जहां सीधा मुकाबला है.
वहीं कार्यकारिणी के लिए 20 में से 11 सदस्यों का चयन करना टेड़ी खीर साबित हो रहा है, क्योकि दोनो और से इस बार कुछ प्रत्याक्षी काम करने वाले और मैदानी कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं समाज को समर्पित करते रहते है, उनका जीतना तय है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि कौन जीतेगा...मतदाता वो सब मतदाताओं के ऊपर निर्भर हैं...
कार्यकारिणी के लिए अधिकांश युवा चुनाव लड़ रहे हैं. अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाने में सफल भी हो रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है, कि चुनाव जीतकर आम समाजजनों के लिए कौन सा विकास का द्ववार खोलोगे...विकास की बात तो बेमानी है, लेकिन हकीकत में विकास के कामों को गिनाया भी जाएगा...हमारे समाज का बजट उस विकास कार्यो के आधार पर निर्धारित नहीं होता है, हर जरूरतमंद चीजों की पूर्ति की जा सके. सीमित संसाधनों से समाज का विकास कार्य प्रगति के दर पर ऐतिहासिक मंजिल छू रहा हैं, लेकिन आर्थिक आधार के स्त्रोत भी बढ़ाने होगे....समुचित विकास वो पैमाना होता है, जहां बुंद...बुंद से काम चलाया जाए...
सारे विकास की बात चुनाव तक ही सीमित नहीं होना चाहिए...चुनाव तो तीन साल बाद फिर आ जायेगे, लेकिन चुनाव के बाद कौन सा विकास मॉडल समाज को सपने दिखाएगा...उस पर बात होना चाहिए...कई बार दुसरे समाज की अच्छाईयों पर भी चर्चा होना चाहिए, वो किस प्रकार अपनी सेवाएं समाज सदस्यों को प्रदान कर रहे है, हम उसे कैसे जमीन की धरातल पर लाकर लाभ के नित्य नए स्त्रोत की तलाश जारी रखेगे...
आज समाज को तेजगति से काम करने की जरूरत है, हमारे पूर्वजों की देन है, समाज के संस्कार और सम्पति, हम उसमें कैसे वुद्वि कर सकते है, इस विषय पर सामूहिक रूप से अपनाने की जरूरत है, तैरे-मेरे की परिभाषा को छोड़ना होगा...सबको साथ लेकर ही विकास का मॉडल स्थापित कर सकते हैं. कुछ छूट गया हा ेतो विकास की गाड़ी में अपनी भी आहूति प्रदान करें, कुछ काम बोलने से नहीं बल्कि जिद्वी से पूरे होते है, वो जिद्वी चुनाव जीतने और चुनाव में किसी कारण से जीत नहीं पाए, उन साथियों को भी साथ लेकर समाज की प्रगति में विकास के काम होना चाहिए...!





