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अख़बार कर्मियों के सच्चे मित्र और मज़दूर नेता प्रेमनाथ भार्गव का निधन

📅 18 December 2025, 01:09 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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अख़बार कर्मियों के सच्चे मित्र और मज़दूर नेता प्रेमनाथ भार्गव का निधन
अख़बार कर्मियों के सच्चे मित्र और मज़दूर नेता प्रेमनाथ भार्गव का निधन

परमानंद पांडे-

अख़बार कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई में आजीवन संघर्षरत रहे वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता और मेरे अत्यंत सम्मानित मित्र स्वर्गीय प्रेमनाथ भार्गव के निधन का समाचार बेहद दुखद है। किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में उसके जाने के बाद लिखना हमेशा कठिन होता है, जिसे आप दिल से मानते और सम्मान करते हों।

प्रेमनाथ भार्गव सिर्फ़ एक मज़बूत ट्रेड यूनियनिस्ट ही नहीं थे, बल्कि मज़दूरों के सच्चे साथी थे। उन्होंने कभी प्रबंधन के आगे सिर नहीं झुकाया, न ही किसी समझौते के आगे अपने सिद्धांतों से विचलित हुए। वह अस्सी वर्ष से अधिक उम्र के थे और हिंदुस्तान टाइम्स से सेवानिवृत्त हुए थे। एक समय उन्हें उसी अख़बार से बर्ख़ास्त कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और अपनी बहाली सुनिश्चित की। अहंकारी और अनुचित प्रबंधन को उन्हें पूरे बकाये के साथ वापस काम पर लेना पड़ा।

भार्गव जी ने इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) को एक अलमारी, लेखन मेज़ और कुछ कुर्सियाँ दान की थीं, जो नई दिल्ली के शंकर मार्केट स्थित कार्यालय में रखी गईं। इसलिए जब हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व फोटो एडिटर और वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता एस.एन. सिन्हा ने उनके निधन की सूचना दी, तो मुझे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ।

जिन्होंने अपना पूरा जीवन मज़दूरों के हक़ के लिए समर्पित कर दिया, उन्होंने मेरे द्वारा संपादित तीन पुस्तकों का प्रूफरीडिंग कार्य भी बेहद वाजिब पारिश्रमिक पर किया। उनका एक सिद्धांत साफ़ था—“प्रबंधन के लिए मैंने कभी मुफ़्त में काम नहीं किया, लेकिन जो शोषक नहीं हैं उनसे कभी ज़्यादा पैसे भी नहीं लिए।”

दाढ़ी वाले, सौम्य स्वभाव के प्रेमनाथ जी बेहद मिलनसार थे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय से मानविकी में स्नातक थे और विशेषकर अख़बार उद्योग में होने वाले हर मज़दूर संघर्ष में उनकी सक्रिय उपस्थिति रहती थी।

आज के समय में, जब नई पीढ़ी में ट्रेड यूनियनवाद के मूल्य दुर्लभ होते जा रहे हैं, कॉमरेड प्रेमनाथ भार्गव हमेशा एक मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ की तरह याद किए जाएंगे। ईश्वर उन्हें ऐसा पुनर्जन्म दे कि वे फिर से मज़दूरों के संघर्ष में साथ खड़े हो सकें।

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