इंदौर
श्री चारभुजानाथ मंदिर इंदौर पर 13 को वरुथिनी एकादशी, सादर आमंत्रित : जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
paliwalwani
इंदौर.
पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर के उत्सव मंत्री श्री जमनालाल व्यास ने पालीवाल वाणी को बताया कि पालीवाल समाज बंधुओं ओर आदरणीय परिजन दिनांक 13 अप्रैल 2026 सोमवार को मंदिर में वरुथिनी एकादशी के पावन पर्व पर कथा यजमान बनने का सौभाग्य श्री माँ सेवा शक्ति मंडल बिजासन को प्राप्त हुआ है, जिसमे आप सभी समाजजन, साथीगण परिवार सहित सादर आमंत्रित हैं.
समय : रात्रि 9.00 बजे से : नोट : आरती का समय 11. 00 बजे
कार्यक्रम स्थल : श्री चारभुजानाथ मंदिर, पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी धर्मशाला इंदौर मध्य प्रदेश
!! आप सभी सादर आमंत्रित हैं !!
13 या 14 अप्रैल, कब है वैशाख महीने की वरुथिनी एकादशी? :
पुराणों के अनुसार वैशाख माह में आने वाली वरुथिनी एकादशी नकारात्मकता, पापों और बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करने वाली मानी जाती है क्योंकि वरुथिनी शब्द संस्कृत मूल से आया है जिसका अर्थ है 'कवचधारी' या 'सुरक्षित'.
वरुथिनी एकादशी व्यक्ति को उन तमाम कष्टों, शत्रु, अनजान भय, पापों से सुरक्षा करती है जो आज के जीवन में मानसिक, शारीरिक या आर्थिक तौर पर परेशान कर रहे हैं. इस साल वरुथिनी एकादशी 13 या 14 अप्रैल किस दिन रखा जाएगा, तारीख में कंफ्यूजन है तो यहां जान लें सही डेट,मुहूर्त.
वैशाख महीने की वरुथिनी एकादशी 2026 में 13 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. एकादशी तिथि 13 अप्रैल की सुबह शुरू होकर अगले दिन 14 अप्रैल 2026 की सुबह समाप्त होगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार व्रत 13 अप्रैल को ही रखा जाएगा. व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) 14 अप्रैल की सुबह किया जाएगा.
वरुथिनी एकादशी व्रत: 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2026, सुबह 01:16 बजेतिथि समापन: 14 अप्रैल 2026, सुबह 01:08 बजेपारण का समय (14 अप्रैल): सुबह 06:57 से 10:13 बजे के बीच
मुख्य बातें : यह एकादशी भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है. इस दिन सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके पूजा करना शुभ माना जाता है.
वरुथिनी एकादशी व्रत की सही विधि
- दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- भोग-विलास और नकारात्मक गतिविधियों से दूरी बनाएं.
- सुबह उठकर दातुन (लकड़ी) या केमिकल वाले टूथपेस्ट का उपयोग न करें.
- नींबू, जामुन या आम के गिरे हुए पत्तों को चबाकर मुंह शुद्ध करें.
- स्नान के बाद मंदिर जाकर भगवद गीता का पाठ करें या सुनें. श्रीहरि की पूजा करें.
- दिनभर गैजेट्स ये सोशल मीडिया से दूर बनाएं.
- रात में जागरण (भजन-कीर्तन) करें.
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें.
वरुथिनी एकादशी पर न करें ये 4 काम
अनाज, शहद, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित है लेकिन खाने-पीने की चीजों से परे, कुछ व्यवहारिक नियम और भी महत्वपूर्ण हैं. क्योंकि भले ही आप भूखे रहें लेकिन व्रत में मुंह या मन से निकला एक भी शब्द, विचार आपकी तपस्या, साधना को भंग कर सकता है, फिर इसका फल नहीं मिलता.
- पेट के उपवास के साथ ज़ुबान का उपवास भी जरुरी है. दूसरों की बुराई करने से बचें, क्रोध से दूर रहें और झूठ बोलने से बचें.
- एकादशी भगवान की सेवा और स्वंय के आत्म चिंतन का दिन है. इसलिए सोशल मीडिया, फोन या ऐसी चीजों से दूरी बनाए जिसकी आपको लत है.
- एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें, इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है. इस दिन बाल नहीं कटायें.
क्या खाएं, क्या नहीं
- कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस या केमिकल युक्त पेय न लें.
- दिन में एक या दो बार भोजन से बचें (हल्का फलाहार बेहतर है).
- तली-भुनी चीजें और आइसक्रीम न खाएं.
- फल, दूध या घर का बना जूस लेना श्रेष्ठ है.
एकादशी के दिन किसी की मृत्यु होने पर क्या करें
एकादशी के दिन किसी सम्बन्धी की मृत्यु हो जाय तो उस दिन व्रत रखकर उसका फल संकल्प करके मृतक को देना चाहिए और श्री गंगाजी में पुष्प (अस्थि) प्रवाहित करने पर भी एकादशी व्रत रखकर व्रत-फल प्राणी के निमित्त दे देना चाहिए. मान्यता है एकादशी व्रत के प्रभाव से मृतक की आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है.





