स्वास्थ्य
शादी से पहले चुपचाप ये टेस्ट क्यों करा रहे हैं दूल्हा-दुल्हन?
Paliwalwani
पहले शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे की सेहत से जुड़ी सामान्य बातों पर चर्चा करते थे, लेकिन अब समय के साथ यह ट्रेंड बदलता नजर आ रहा है। आजकल कई कपल्स शादी से पहले हेल्थ चेकअप के साथ-साथ फर्टिलिटी टेस्ट भी करवा रहे हैं, वह भी बिना किसी को बताए।
खास बात यह है कि अब सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी फैमिली प्लानिंग को लेकर पहले से सजग हो रहे हैं और फर्टिलिटी जांच करा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, शादी के बाद किसी अनचाही परेशानी से बचने के लिए कपल्स पहले ही यह जान लेना चाहते हैं कि भविष्य में माता-पिता बनने को लेकर कोई समस्या तो नहीं होगी।
ओपीडी में बढ़े प्री-मैरिज फर्टिलिटी टेस्ट
हाल के वर्षों में अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है जो शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट कराने पहुंच रहे हैं। कई मामलों में जांच के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिनकी उम्मीद सबसे कम होती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार महिला के सभी टेस्ट नॉर्मल होते हैं, लेकिन पुरुषों में जन्मजात कारणों से स्पर्म काउंट या क्वालिटी कम पाई जाती है। ऐसे में शादी से पहले जांच कराना कपल्स को मानसिक रूप से तैयार होने में मदद करता है।
शुक्राणुओं की संख्या में लगातार गिरावट
रिसर्च के मुताबिक, दुनिया भर में पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या लगातार घट रही है। एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, 1970 के दशक से लेकर हाल के वर्षों तक पुरुषों में औसत स्पर्म कंसन्ट्रेशन में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर स्पर्म काउंट को सामान्य की निचली सीमा माना जाता है, लेकिन पहले के मुकाबले आज स्वस्थ स्पर्म काउंट वाले पुरुषों की संख्या काफी कम हो गई है।
अब भी महिलाओं को ठहराया जाता है जिम्मेदार
हालांकि समाज में अब भी बांझपन के लिए महिलाओं को ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में बांझपन के कुल मामलों में लगभग 40 प्रतिशत पुरुष कारण होते हैं, 40 प्रतिशत महिलाएं, 10 प्रतिशत मामलों में दोनों पार्टनर जिम्मेदार होते हैं, जबकि 10 प्रतिशत मामलों में कारण स्पष्ट नहीं हो पाता।
पुरुषों में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारण
पुरुषों में बांझपन को आमतौर पर तब माना जाता है जब एक साल तक नियमित और बिना सुरक्षा संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ स्पर्म काउंट तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्पर्म की गति (मोटिलिटी) और बनावट (मॉर्फोलॉजी) भी अहम भूमिका निभाती है।
एक प्रमुख भारतीय अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में बांझपन के सामान्य कारणों में एजूस्पर्मिया (जहां सैंपल में स्पर्म नहीं मिलते) और OATS सिंड्रोम शामिल हैं, जिसमें स्पर्म की संख्या, गति या आकार सामान्य से कम होता है।
लाइफस्टाइल और प्रदूषण भी जिम्मेदार
पुरुषों की फर्टिलिटी पर उम्र के साथ असर पड़ता है, जिसे मेल बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है। इसके अलावा धूम्रपान, शराब का सेवन, गलत खानपान, तनाव और लंबे समय तक काम करना स्पर्म की क्वालिटी को नुकसान पहुंचाता है।
हालिया शोध बताते हैं कि एयर पॉल्यूशन, केमिकल्स, माइक्रो और नैनोप्लास्टिक्स, साथ ही हार्मोन को प्रभावित करने वाले तत्व भी स्पर्म क्वालिटी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। BPA, फ्थेलेट्स और कुछ कीटनाशक हार्मोन संतुलन बिगाड़ते हैं, जबकि PM 2.5 और भारी धातुएं स्पर्म डीएनए और टेस्टिस को नुकसान पहुंचाती हैं।
बदलती सोच की निशानी
विशेषज्ञ मानते हैं कि शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट कराना समाज में बढ़ती जागरूकता और बदलती सोच का संकेत है। अब कपल्स भविष्य की योजना को लेकर ज्यादा व्यावहारिक और तैयार रहना चाहते हैं, ताकि शादी के बाद किसी भी तरह के मानसिक, सामाजिक या पारिवारिक दबाव से बचा जा सके।





