फर्टिलिटी से जुड़ी कुछ आदतें जो प्रेगनेंसी में बन सकती है बाधा : डॉ. चंचल शर्मा
इनफर्टिलिटी की समस्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। यह ना केवल भारत के लिए बल्कि पुरे विश्व के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। महिलाओं में फर्टिलिटी कम होने के कई कारण हो सकते हैं जिसमें स्ट्रेस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके साथ ही अनियंत्रित जीवनशैली, असंतुलित आहार और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी आपके फर्टिलिटी में गिरावट की वजह बन सकती है। आजकल करियर को लेकर बढ़ती हुयी जागरूकता के कारण महिलाएं देर से शादी करती हैं और फिर प्रेगनेंसी प्लान करते करते उम्र ज्यादा हो जाती है तो कन्सीव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा बताती हैं कि महिलाओं में इनफर्टिलिटी के कई कारण हो सकते हैं लेकिन अगर आप 1 साल से कन्सीव करने की कोशिश कर रही हैं और कोई सफलता नहीं मिल रही है तो आपको अपने शरीर में होने वाले बदलाव को समझना चाहिए क्यूंकि ये इनफर्टिलिटी का संकेत हो सकते हैं :
कोल्ड यूटेरस : कोल्ड यूटेरस गर्भाशय की वह अवस्था है जिसमे यूटेरस के अंदर रक्त का बहाव अच्छे से नहीं हो पाता है। अगर ब्लड का फ्लो सही नहीं होगा तो स्पर्म एग से नहीं मिल पायेगा और अगर एग फर्टिलाइज़्ड हो जाता है तो कोल्ड यूटेरस के कारण वह वहां विकसित नहीं हो पाता है। इसलिए आपका गर्भधारण कर पाना मुश्किल होता है।
महिलाओं के शरीर में कोल्ड यूटेरस को कैसे पहचानें ?
किडनी में खराबी के लक्षणों को कैसे पहचानें?
महिलाओं में इनफर्टिलिटी का एक और कारण है किडनी में खराबी होना। ऐसी स्थिति में एक महिला का माँ बन पाना मुश्किल है। किडनी में खराबी के लक्षण इस प्रकार हैं:
डॉ चंचल शर्मा कहती हैं कि आपके स्वास्थ्य की देखभाल तभी संभव है जब आप अपने शरीर के अंदर की आवाज को समझेंगे। आपको इन सभी संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और ऐसे किसी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। क्यूंकि इन सकेतों को आप जितना नजरअंदाज करेंगे आपके लिए इनफर्टिलिटी की समस्या उतनी ही गंभीर हो जाएगी।
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