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दिल्ली

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई 14 सितंबर को

📅 07 September 2023, 04:45 AM • ✍️ Paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई 14 सितंबर को
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई 14 सितंबर को

नई दिल्ली :

(आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ दायर मानहानि मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर के लिए तय की। यह मामला कथित तौर पर गहलोत द्वारा संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले के सिलसिले में दिए गए "भ्रामक बयानों" से संबंधित है। गहलोत और शेखावत, दोनों बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) हरजीत सिंह जसपाल की अदालत में वर्चुअली पेश हुए।

यह देखते हुए कि इस मामले में गहलोत द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज प्राप्त हो गए हैं, एसीएमएम जसपाल ने कहा : “शिकायतकर्ता की ओर से यह सूचित किया गया है कि सभी दस्तावेज, रंगीन प्रतियों सहित, पहले ही ई-मेल के माध्यम से भेजे जा चुके हैं। उन्‍होंने कहा, "आरोपी के वकील ने ई-मेल की प्राप्ति की बात स्वीकार की है। यह भी स्वीकार किया गया है कि प्रतिलिपि एजेंसी (अदालत की) के माध्यम से प्रमाणित प्रतियां भी प्राप्त हुई हैं। चूंकि दस्तावेज अब पूरे हो गए हैं, इसलिए मामले को बहस के लिए 14 सितंबर 2023 को रखा जाए।

इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को शेखावत की शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया था। जसपाल ने कहा था कि जांच ऐसी होनी चाहिए कि तीन मुख्य सवाल - क्या शिकायतकर्ता शेखावत को आरोपी गहलोत द्वारा संजीवनी घोटाले में "आरोपी" के रूप में संबोधित किया गया था, क्या गहलोत ने कहा था कि शेखावत के खिलाफ लगाए गए आरोप संजीवनी घोटाले में साबित हुए हैं, और क्या शेखावत या उनके परिवार के सदस्यों को घोटाले की जांच में "आरोपी" के रूप में सूचीबद्ध किया गया है - इसका उत्तर दिया गया है।

शेखावत ने इस साल मार्च में गहलोत के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि संजीवनी मामले की जांच शुरू की गई थी, लेकिन उनके नाम का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था, और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक मानहानि के लिए गहलोत के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की थी। उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा के नुकसान के लिए उचित वित्तीय मुआवजे की भी मांग की। 21 फरवरी को राज्य सचिवालय में बजट समीक्षा बैठक के बाद गहलोत ने कहा था कि उनके माता-पिता और पत्नी सहित पूरा शेखावत परिवार संजीवनी घोटाले में शामिल था।

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