Friday, 27 March 2026

बॉलीवुड

अभिनेता सलमान खान पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में कानूनी घेराबंदी : अदालत ने पुलिस को दिया निर्देश

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अभिनेता सलमान खान पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में कानूनी घेराबंदी : अदालत ने पुलिस को दिया निर्देश
अभिनेता सलमान खान पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में कानूनी घेराबंदी : अदालत ने पुलिस को दिया निर्देश

मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में कानूनी घेराबंदी में फंसते नजर आ रहे हैं. जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग  ने उनके खिलाफ जारी जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस की विशेष टास्क फोर्स गठित करने के आदेश दिए हैं.

आयोग ने निर्देश दिया है कि यह टीम मुंबई जाकर सलमान खान को वारंट तामील कराए. आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि वारंट की तामील में बाधा उत्पन्न होती है या फिर 6 अप्रैल को सलमान खान के साथ पान मसाला कंपनी के निदेशक राकेश कुमार चौरसिया और दिनेश कुमार चौरसिया आयोग के समक्ष पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा.

'सेलिब्रिटी कानून से ऊपर नहीं'

आयोग के अध्यक्ष जीएल मीणा और सदस्य सुप्रिया अग्रवाल व अजय कुमार की पीठ ने पुलिस महानिदेशक के माध्यम से जयपुर पुलिस आयुक्त और उपायुक्त को यह आदेश जारी किए हैं. यह आदेश परिवादी योगेन्द्र सिंह की ओर से दायर शिकायत पर पारित किया गया है. आयोग ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि सेलिब्रिटी स्टेटस किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं देता है. वारंट की तामील नहीं होना कानून का मखौल है और इससे उपभोक्ताओं का आयोगों पर विश्वास भी कमजोर होता है.

केसर होने के दावे पर किया मुकदमा

मामले की शुरुआत योगेंद्र सिंह के दायर परिवाद से हुई, जिसमें राजश्री पान मसाला के विज्ञापन पर पाबंदी लगाने की मांग की गई. शिकायत में कहा गया कि उत्पाद को केसर युक्त बताया जा रहा है, जबकि उसकी कीमत के आधार पर उसमें वास्तविक केसर होना संभव नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है.

इससे पहले भी इस मामले में सलमान खान और पान मसाला कंपनी को राहत नहीं मिली है. राज्य उपभोक्ता आयोग ने उनकी निगरानी याचिकाओं को खारिज करते हुए भ्रामक विज्ञापन के मामलों में सख्ती के संकेत दिए थे. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को यह सिफारिश भी की गई थी कि ऐसे मामलों को केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण तक सीमित न रखकर राज्य उपभोक्ता आयोगों के दायरे में भी लाया जाए.

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