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मध्यप्रदेश कांग्रेस के लिए फिर संजीवनी बन सकते हैं कमलनाथ : जमीन से जुड़े नेतृत्व की जरूरत
paliwalwani
मप्र कांग्रेस को राज्यसभा की सीट बचानी है तो कमलनाथ पर करना होगा भरोसा
हाईकमान को मध्यप्रदेश के मौजूदा हालातों पर करना होगा विचार
2028 की राह में कांग्रेस को फिर कमलनाथ पर भरोसा करना चाहिए
विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
मई-जून 2026 में प्रस्तावित तीन सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस का ध्यान एक ऐसे चेहरे पर टिक रहा है, जो अनुभव, संतुलन और संगठन तीनों का संगम माना जाता है। वर्तमान में कमलनाथ ही ऐसे चेहरे के रूप में सामने आ रहे हैं।
यह भी सच है कि कांग्रेस के लिए राज्यसभा की एक सीट बचाना मुश्किल समझ आ रहा है। ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं कि बीजेपी, कांग्रेस से यह भी सीट छीन सकती है। यदि कांग्रेस को यह सीट बचानी है तो कमलनाथ को आगे आना होगा। हाईकमान को आज मप्र में ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो जमीन से जुड़ा हो। राज्यसभा में भी ऐसे ही नेता को उम्मीदवार बनाना होगा। हाईकमान को मध्यप्रदेश के मौजूदा हालातों पर विचार करना होगा।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के लगभग 06 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। यह डर कांग्रेस को सताने लगा है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2023 के बाद कांग्रेस के पास 65 विधायकों की ताकत थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह संख्या 62 के आसपास सिमट गई है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों का समर्थन आवश्यक है, जो कांग्रेस के पास है।
हालांकि, यह गणित जितना सरल दिखाई देता है, उतना है नहीं। हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में हुए क्रॉस वोटिंग के अनुभव ने कांग्रेस को सतर्क कर दिया है। ऐसे में पार्टी किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। यहीं पर कमलनाथ का नाम सबसे भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरता है। उन्हें ‘मैनेजमेंट का माहिर’ माना जाता है ऐसा नेता जो न केवल अपने विधायकों को एकजुट रख सकता है, बल्कि विरोधी खेमे की चालों को भी निष्प्रभावी करने की क्षमता रखता है।
वर्तमान परिदृश्य में जब कांग्रेस संगठनात्मक चुनौतियों, नेतृत्व के अभाव और रणनीतिक असमंजस से जूझती नजर आ रही है, तब एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे भरोसेमंद चेहरे के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। यह केवल एक व्यक्ति का समर्थन नहीं, बल्कि उस अनुभव, दृष्टि और राजनीतिक परिपक्वता पर भरोसा है, जिसने प्रदेश की राजनीति को कई बार नई दिशा दी है।
आज भी बरकरार है जमीन से जुड़ा नेतृत्व
राजनीति में लोकप्रियता केवल पद से नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव से तय होती है। कमलनाथ ने सरकार जाने के बाद भी अपने राजनीतिक और सामाजिक संपर्क को कमजोर नहीं होने दिया। वे लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे, समस्याओं को सुना और संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया। यही कारण है कि आज भी वे कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी स्वीकार्यता सभी वर्गों में बनी हुई है। संगठन के भीतर भी वे एक ऐसे नेता हैं, जो विभिन्न गुटों को एक मंच पर ला सकते हैं।
रणनीति और नेतृत्व की कसौटी
आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित होंगे। ऐसे में पार्टी को केवल उत्साह नहीं, बल्कि ठोस रणनीति और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। कमलनाथ इस कसौटी पर खरे उतरते दिखाई देते हैं। उनका अनुभव, चुनावी प्रबंधन की समझ और राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क कांग्रेस के लिए बड़ा लाभ साबित हो सकता है। वे केवल चुनाव लड़ने वाले नेता नहीं, बल्कि चुनाव जिताने वाले रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। यदि कांग्रेस को सत्ता में वापसी करनी है, तो उसे एक ऐसे चेहरे पर भरोसा करना होगा, जो संगठन को एकजुट रख सके, कार्यकर्ताओं में विश्वास जगा सके और जनता के बीच मजबूत संदेश दे सके।
पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के गुटबाजी पर नियंत्रण
मध्यप्रदेश कांग्रेस की एक बड़ी चुनौती गुटबाजी रही है। कई बार यह आंतरिक मतभेद चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं। उनकी विशेषता यह रही है कि वे संगठन के विभिन्न वर्गों और नेताओं के बीच संतुलन बनाने में सक्षम रहे हैं। उनकी नेतृत्व शैली में संवाद, समन्वय और सामंजस्य की झलक मिलती है, जो किसी भी बड़े संगठन के लिए आवश्यक होती है। यदि पार्टी उन्हें फिर से केंद्रीय भूमिका देती है, तो यह गुटबाजी को कम करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रभाव
कमलनाथ का अनुभव केवल राज्य तक सीमित नहीं है। वे लंबे समय तक केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसका लाभ यह है कि वे राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर प्रभावी संवाद स्थापित कर सकते हैं। राज्यसभा या अन्य किसी मंच के माध्यम से उनकी सक्रियता कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती दे सकती है। साथ ही, वे प्रदेश के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं।
विजन और क्रियान्वयन का संगम
किसी भी राजनीतिक दल की सफलता केवल वादों पर नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। कमलनाथ का राजनीतिक जीवन इस बात का प्रमाण है कि वे विजन और क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाने में सक्षम हैं। यदि कांग्रेस उनके नेतृत्व में 2028 की तैयारी करती है, तो यह केवल एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक व्यापक विकास दृष्टि का हिस्सा हो सकता है।





