Monday, 01 September 2025

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इंडियन टू-व्हीलर इंडस्ट्री को नुकसान! Royal Enfield ने की एक समान GST की मांग

paliwalwani
इंडियन टू-व्हीलर इंडस्ट्री को नुकसान! Royal Enfield ने की एक समान GST की मांग
इंडियन टू-व्हीलर इंडस्ट्री को नुकसान! Royal Enfield ने की एक समान GST की मांग

Royal Enfield के MD सिद्धार्थ लाल ने सरकार से दोपहिया वाहनों पर एक समान 18% GST लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि स्प्लिट टैक्स सिस्टम से इंडियन टू-व्हीलर इंडस्ट्री को नुकसान होगा.

भारत की दोपहिया वाहन इंडस्ट्री लंबे समय से "मेक इन इंडिया" की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक मानी जाती है. आज यह सेक्टर एक अहम मोड़ पर खड़ा है. प्रधानमंत्री के हालिया GST सुधारों के ऐलान के बाद वाहनों की कीमतें घटने की चर्चाएं तेज हो गईं. वहीं दूसरी तरफ, Royal Enfield की मूल कंपनी आयशर मोटर्स लिमिटेड के MD और CEO सिद्धार्थ लाल ने सरकार से गुहार लगाई है कि सभी टू-व्हीलर्स पर एक समान 18% GST लागू की जाए.

दरअसल, सिद्धार्थ लाल का कहना है कि बंटा हुआ टैक्स सिस्टम भारतीय टू-व्हीलर इंडस्ट्री को कमजोर कर सकता है. उनका मानना है कि 350cc से अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलें भारत के टू-व्हीलर बाजार का केवल 1% हिस्सा हैं और इनसे सरकार को मामूली राजस्व ही मिलता है. लेकिन इस पर ज्यादा टैक्स लगाने से यह पूरा सेगमेंट सिकुड़ सकता है. सिद्धार्थ लाल ने लिखा कि भारतीय बाजार में बाइक को लग्जरी नहीं, बल्कि कार का सस्ता विकल्प माना जाता है. बाइक से कम फ्यूल खर्च होता है और इसकी देखभाल भी आसान होती है. इसी वजह से देश का फ्यूल इंपोर्ट भी कम होता है.

भारत आज छोटे इंजन क्षमता वाले सेगमेंट में ग्लोबल लीडर है और अब बड़े इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों में भी गहरी पैठ बना रहा है, लेकिन अगर 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिलों पर ज्यादा GST लगाया गया तो भारतीय ब्रांड्स की ग्लोबल रीच सीमित हो जाएगी. इस स्थिति में विदेशी कंपनियों को फायदा मिलेगा क्योंकि उनके देशों में टैक्स स्ट्रक्चर ज्यादा संतुलित है. नतीजतन वे मिड-साइज सेगमेंट पर कब्जा कर लेंगे और फिर छोटे इंजन क्षमता वाले बाजार में भी भारत की पकड़ को कमजोर कर सकते हैं.

सिद्धार्थ लाल ने ये भी कहा कि अगर सभी दोपहिया वाहनों पर एक समान 18% GST लागू किया जाता है, तो भारत न केवल पेट्रोल और डीजल टू-व्हीलर्स में, बल्कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (EVs) में भी दुनिया का लीडर बन सकता है. इस कदम से बैटरी, सेमीकंडक्टर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे Ancillary Industries को भी बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, भारत को नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी का ग्लोबल हब बनाने का रास्ता साफ होगा.

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