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सड़क हादसों की रिपोर्टिंग-सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह खराब रोड इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट, हाइवे पर गलत तरीके से पार्क किए वाहन : एक सिविल इंजीनियर की राय

📅 16 January 2026, 10:46 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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सड़क हादसों की रिपोर्टिंग-सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह खराब रोड इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट, हाइवे पर गलत तरीके से पार्क किए वाहन : एक सिविल इंजीनियर की राय
सड़क हादसों की रिपोर्टिंग-सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह खराब रोड इंजीनियरिंग, ब्लैक स्पॉट, हाइवे पर गलत तरीके से पार्क किए वाहन : एक सिविल इंजीनियर की राय
  • सड़क हादसों की रिपोर्टिंग में ज्यादातर अखबार समस्या की जड़ में जाने के बजाय वही लिखते हैं जो उन्हें पुलिस बताती है। हर हादसे अबके बाद अखबार लिखते हैं - सीट बेल्ट नहीं पहना था.., वाहन की गति ज्यादा थी ..., चालक नशे में था ..! 
  • एक सिविल इंजीनियर होने के नाते और हाइवे इंजीनियरिंग की बुनियादी पढ़ाई की बिना पर मेरा मानना है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह खराब रोड इंजीनियरिंग , ब्लैक स्पॉट, हाइवे पर गलत तरीके से पार्क किए वाहन, बगैर बैक लाइट या रिफ्रैक्टर रेडियम लगे डंपर और ट्रैक्टर ट्रालियां होते हैं ।

    इंदौर में हुए हाल ही में हुए एक दुखद हादसे में तीन बच्चों की मौत हो गई ।सारे अखबारों ने नशे , सीट बेल्ट और स्पीड की बात की , किसी ने यह नहीं लिखा के बीच सड़क पर जो डंपर खड़ा था उसमें कोई रेडियम रिफ्लेक्टर लगा हुआ था या नहीं ? या वह सड़क के किनारे था या बीच में था? आधी रात में कोहरे और धुंध के बीच यदि सड़क पर कोई डंपर बगैर बैक लाइट या रिफ्लेक्टिव रेडियम के खड़ा हो तो सामान्य स्पीड पर होशमंद ड्राइवर भी उसे नहीं देख पाएगा और टकरा जाएगा । 

    मुझे रात में ड्राइव के दौरान सबसे ज्यादा खौफ सड़क किनारे खड़े डंपरों से लगता है , जो मर्जी मुताबिक कही भी पार्क कर दिए जाते हैं और बिल्कुल दिखाई नहीं देते ।

    दो पांच रुपए का  रेडियम रिफ्लेक्टर यदि ये डंपर वाले लगा लें तो सैकड़ों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। डंपर  मालिकों से यह उम्मीद बेकार है क्योंकि वे जिस लोक में रहते हैं वहां से आम आदमी कीड़े मकोड़े जैसा दिखता है। पर दुख की बात ये कि मीडिया, पुलिस और नागरिक संगठन भी इसे लेकर आवाज नहीं उठाते।हमारी मुस्तैद पुलिस की सारी ऊर्जा और कर्त्तव्यपरायणता  शहर के व्यस्ततम चौराहों पर गरीब मजदूर कारीगरों के हेलमेट और कागजों का चालान काटने में ही खत्म हो जाती है , फिर इन डंपरों के मालिक रसूखदार नेता और पहलवान होते हैं ।

    पुलिस से कोई उम्मीद करना बेकार है, यह काम सामाजिक संगठनों को करना चाहिए कि हर टोल नाके पर से गुजरते इन डंपर और ट्रैक्टर ट्रालियों पर रेडियम रिफ्लेक्टर अपनी ओर से मुफ्त लगाए।

    हर शहर में इंजीनियरों की संस्थाएं हैं , वे अपनी तरफ से ब्लैक स्पॉट , खराब मोड़ और अनियंत्रित ढलान पहचानें, सर्वे करें , उसके लिए आवाज उठाएं ।

    और प्रिय पत्रकार मित्रों ,  हादसे के बाद कभी मौके पर जाकर समझ लिया कीजिए कि असली वजह क्या है.!

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