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पालीवाल समाज 730 साल से नहीं मनाते है रक्षाबंधन : दिनेश पालीवाल

📅 03 August 2020, 02:37 AM ✍️ paliwalwani.com ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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पालीवाल समाज 730 साल से नहीं मनाते है रक्षाबंधन : दिनेश पालीवाल
पालीवाल समाज 730 साल से नहीं मनाते है रक्षाबंधन : दिनेश पालीवाल

पाली । भाई-बहन के अटूट विश्वास प्रेम का त्यौहार रक्षाबंधन जो बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, बहन अपने भाई के हाथ पर कलाई पर रक्षा सूत्र बांधाती है और जीवन भर अपनी रक्षा का वचन लेती है और भाई वचन देता है, ऐसे पावन त्यौहार को पूरे देश में पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोग नहीं मनाते हैं लगभग 730 साल पहले की बात है। राजस्थान का पाली शहर अपनी संपन्नता व वेभवता के कारण देश में ही नहीं विदेशों में भी विख्यात था। वहा के पालीवाल ब्राह्मण धनाढ्य व संपन्न लोग थे, जिन पर दिल्ली के बादशाह नसरुद्दीन शाह की पूरी नजर पड़ गई और फिर दिल्ली के बादशाह ने पाली को अपने कब्जे में लेने के लिए उस पर चढ़ाई करने की सोची उसने एक बड़ी भारी फौज जिसमें मुगल पठान शेख आदि थे को ईखट्टा किया। पाली पर चढ़ाई करने के लिए भेज दिया और गढ़वाली को चारों तरफ से घेराबंदी कर मोर्चा बंदी हो गई। उधर जब पाली में रहने वाले ब्राह्मणों को जब पता चला तो सब एकजुट होकर सबने तलवारें उठा ली वे सभी एक होकर लगातार मुसलमानों की फौज से लड़ते रहे। मरते रहे मारते रह लेकिन उनको अपने ऊपर अधिकार नहीं करने दिया और कब्जा नहीं करने दिया जब मुगल बादशाह पालीवाल ब्राह्मणों से नहीं जीत सका तो उसने षड्यंत्र रच कर पानी पीने के भी जड़ा सरोवर में लाल रंग का क्यों बोल दिया वह उसके आसपास गायों को काटकर डाल दिया गया ताकि उससे वह ब्राह्मण यह समझे कि इसमें गायों का रक्त मिला दिया। पानी में तो इस प्रकार मजबूर करके उनको फिर पाली त्याग नहीं पड़ी यह युद्ध रक्षाबंधन तक चला था उसमें हजारों पालीवाल शहीद हुए जिसमें 9 मण जनेऊ 84 मन चूड़ा उतरा था तब से पालीवाल ब्राह्मण समाज जो पाली से निकले हुए हैं आज दिन तक रक्षाबंधन नहीं मनाते हैं। संक्षेप में विवरण अंकित किया है। ऐसे पाली की धरोहर और पालीवाल ब्राह्मण समाज का इतिहास सालों साल तक ऐतिहासिक इतिहास रहा है। 

● पालीवाल वाणी ब्यूरो...✍️

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