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लापरवाही का मरकज़, संकट में देश : डॉ. अर्पण जैन
Sunil paliwal-Anil bagora April 02, 2020 02:36 AM IST

ईश्वर पर अनंत आस्था होना आवश्यक तो है किंतु संकट काल में ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार करके जानकारी छुपाना भी तो गुनाह की श्रेणी में ही आता हैं। यही हाल हुआ दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ और इन्दौर के रानीपुरा में भी।

कोरोना वायरस की वजह से जब पूरा देश घरों में बैठने को मजबूर है वहीं दिल्ली के निज़ामुद्दीन में 1300 से 1400 लोग मरकज़ धार्मिक समारोह के लिए जमा हुए थे। इनमें से कई लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं। यहाँ मरकज़ के लिए जो लोग आए थे वो तबलीगी जमाज के थे,  देश भर के 1200 से 1600 लोग निज़ामुद्दीन में मरकज़ यानी किसी सभा या बैठक के लिए आए थे। तबलीगी का मतलब है अल्लाह की बातों का प्रचार-प्रसार करना।

जमात का मतलब होता है समूह : यानी ईश्वर की कही बातों का प्रचार-प्रसार करने वाले समूह को तबलीगी जमात कहते हैं। ये लोग इस्लाम को मानते हैं। माना जाता है कि दुनिया भर में इस जमात के करीब 15 करोड़ सदस्य हैं। दिल्ली के निज़ामुद्दीन में इस जमात का हैडक्वार्टर है। दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन स्थित मरकज़ में न सिर्फ़ देश के विभिन्न राज्यों से बल्कि विदेशों से भी 1 मार्च से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लेने के लिए पहुँचे थे। देश-विदेश के लोगों को मिलाकर कुल 1830 लोग मरकज में पहुँचे थे। इस अवधि के बाद भी 1,400 लोग यहाँ रुके हुए थे। कोरोनावायरस के चलते मरकज से अब तक कुल 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुँचाया जा चुका है। वहीं अभी 300 और लोगों को निकाल कर अस्पताल ले जाया जा रहा है। इन्हीं में से मरकज़ में शामिल होने वाले छह लोगों की तेलंगाना में कोरोना वायरस से मौत हो गई और अंडमान में 10 लोगों की रिपोर्ट में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। 

इन 10 में 9 लोग वे हैं जो दिल्ली के मरकज़ में शामिल हुए थे। 10वीं संक्रमित महिला भी इन्हीं में से एक की पत्नी है जो दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्थित मरकज़ में शामिल हुए थे। हद तो तब हो गई जब तबलीगी जमात के प्रमुख को इस लापरवाही के लिए तलब किया तो ये महाशय कोरोना को महज़ साधारण बीमारी ही मान रहे हैं। शिक्षा की कमी का दूसरा नमूना मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर के रानीपुरा, टाटपट्टी बाखल, बम्बई बाज़ार और खजराना में दिखा। सामूहिक रूप से मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की ज़िद पर अड़े रहना, संक्रमण की जाँच के लिए लेने आये स्वास्थ्य अधिकारियों पर थूकना, मारना, गाली देना, और बावजूद इसके जानकारी, यात्राओं की जानकारी छुपाना, बुख़ार तक में लापरवाही बरतना, इसी बात की ओर इशारा करता है कि अशिक्षा वर्ग विशेष पर कितनी हावी है।  कमाल है साहब! ईश्वर पर विश्वास होना ज़रूरी है किंतु अन्धविश्वास के चलते उपलब्ध चिकित्सकीय सावधानियों को अनदेखा करना भी तो संकट को आमंत्रित करना ही है। सोशल मीडिया में आए कई वीडियों इस बात की पुख़्ता गवाही देते हैं कि मौलानाओं ने भी शिक्षित न होना स्वीकार करते हुए सम्पूर्ण देश को संकट में डाल दिया।

जनता कर्फ़्यू के पहले ही आने वाले शुक्रवार को जब देश की परिस्थिति विकट हो रही थी तब सामूहिक रूप से जुम्मे की नमाज़ अदा न करके घरों पर ही रहकर नमाज़ पढ़ने का शासकीय आग्रह था तब ही कुछ अनपढ़ लोगों ने इसे धर्म विरुद्ध कहना शुरू कर दिया, और सीधे मुद्दे को सम्प्रदाय विशेष से जोड़ना शुरू कर दिया। नहीं मानी सरकारी मुनादी और ख़ुद भी मुसीबत में आए और शहर और देश को भी संकट में डाल दिया। आज जमातियों को ढूँढने, उनसे जुड़े मिलने वाले लोगों को ढूँढना, अब सरकार के लिए संकट खड़ा हो गया। इन्दौर में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। अब भी वक़्त है, समय रहते यदि शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया तो संकट टलेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा। आज कोरोना के कारण जब हालात ख़राब है तब तो कम से कम शिक्षित लोगों को आगे आकर इस महामारी के प्रति जागरुक करना चाहिए, अन्यथा यह देश के लिए बड़ा खतरा खड़ा कर देंगे।

डॉ. अर्पण जैन "अविचल"...✍️ 09406653005

● पालीवाल वाणी ब्यूरो-Sunil Paliwal-Anil Bagora...✍️

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