धर्मशास्त्र

आज पुरोहित परिवार की ओर से आयोजन : परमा एकादशी व्रत 2023 : सिद्धियों को देने वाली परमा एकादशी की व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

Paliwalwani
आज पुरोहित परिवार की ओर से आयोजन : परमा एकादशी व्रत 2023 : सिद्धियों को देने वाली परमा एकादशी की व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व
आज पुरोहित परिवार की ओर से आयोजन : परमा एकादशी व्रत 2023 : सिद्धियों को देने वाली परमा एकादशी की व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

इंदौर :

12 अगस्त 2023 दिन शनिवार को परमा एकादशी मनाई जा रही है. पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी और 24 श्रेणी इंदौर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रावण अधिकमास समाजबंधुओ की ओर धूमधाम से आयोजित किए जा रहे हैं. आज इसी कड़ी में श्री चारभुजानाथ मंदिर पर श्रावण अधिकमास की शुक्ल पक्ष माह की पुरुषोत्तमी एकादशी पर परमा एकादशी  पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन पालीवाल ब्राह्मण समाज के समाजसेवी श्री सत्यनारायण पुरोहित एवं कोषमंत्री श्री शिवलाल पुरोहित (ग्राम ईशरमंड) की ओर से मनाया जा रहा है, आप सभी धर्मप्रेमी जनता से सादर अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ अवश्य प्राप्त करें. भजनां की शानदार प्रस्तुति रात्रि 8. 00 बजे से आरंभ और रात्रि 11. 00 बजे भव्य आरती के तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया जाएगा. उपरोक्त जानकारी पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर के उत्सव मंत्री श्री पुरूषोत्तम बागोरा (बालक) ने पालीवाल वाणी को दी.

इंदौर : आज 12 अगस्त 2023 दिन शनिवार को परमा एकादशी धूमधाम से मनाई जा रही है. पालीवाल ब्राह्मण समाज 24 श्रेणी इंदौर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रावण अधिकमास समाजबंधुओ की ओर धूमधाम से आयोजित किए जा रहे हैं. आज इसी कड़ी में श्री मां अन्नपूर्णा मंदिर परिसर पर श्रावण अधिकमास की शुक्ल पक्ष माह की पुरुषोत्तमी एकादशी पर परमा एकादशी पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन का पाठ होगा.

श्रीमती कंकूदेवी स्व. श्री हेमराज जी पुरोहित सार्वजनिक पारमार्थिक ट्रस्ट (भाणा-राज) इंदौर यात्रा के संयोजक श्री वासुदेव पुरोहित, वर्दी चंद पुरोहित च. अजय पुरोहित (ग्राम. भाणा) ने पालीवाल वाणी को बताया कि प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी परम पूजनीय माता-पिता के नाम से हमारे परिवार में निर्मित श्रीमती कंकूदेवी स्व. श्री हेमराज जी पुरोहित सार्वजनिक पारमार्थिक ट्रस्ट (भाणा-राज) इंदौर के द्वारा मनाया जा रहा है, आप सभी धर्मप्रेमी जनता से सादर अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ अवश्य प्राप्त करें. मधूर भजनों की शानदार प्रस्तुति समाज बंधुओं के द्वारा रात्रि 8. 00 बजे से आरंभ और रात्रि 11. 00 बजे भव्य आरती के तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया जाएगा. 

12 अगस्त 2023 दिन शनिवार को परमा एकादशी मनाई जा रही है. यह श्रावण अधिक मास की द्वितीय एकादशी है, जिसे परमा, पुरुषोत्तमी एकादशी के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं यहां समस्त सिद्धियों को देने वाली परमा एकादशी की कथा, पूजन की सरल विधि और इसके महत्व के बारे में. 

व्रत कथा : परमा एकादशी व्रत की कथा के अनुसार पुरातन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण रहता था. उसकी स्त्री का नाम पवित्रा था, जो नाम के अनुरूप ही सती और साध्वी थी. परंतु दोनों ही बहुत ही गरीब थे. हालांकि वे बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे और सदा अतिथियों की सेवा में तत्पर रहते थे. 

एक दिन निर्धनता से दुखी होकर ब्राह्मण ने दूर देश में जाने का विचार किया, परंतु उसकी पत्नी ने कहा- ‘स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान और पुण्य से ही प्राप्त होते हैं, अत: इस बात की चिंता न करें और सभी प्रभु पर छोड़ दें. फिर एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर पधारे. दोनों ब्राह्मण दंपति ने यथाशक्ति तन-मन से उनकी सेवा की. 

महर्षि ने उनकी गरीब दशा देखकर उन्हें कहा कि दरिद्रता को दूर करने का बहुत ही सरल उपाय यह है कि तुम दोनों मिलकर अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा पंच रात्रि जागरण करो. इस एकादशी का व्रत करने से यक्षराज कुबेर तुम्हें धनाधीश बना है, क्योंकि इसी से हरिशचंद्र राजा हुए हैं. ऐसा कहकर महर्षि कौडिन्य चले गए.

इसके बाद सुमेधा और उनकी पत्नी पवित्रा ने यह व्रत विधिवत रूप से किया. इसके बाद प्रात : काल कहीं से एक राजकुमार अश्‍व पर चढ़कर आया और उसने इन दोनों धर्मपरायण एवं व्रती दंपत्ति को देखा, देखकर उसे बड़ी दया आई और उसने दोनों को सर्व साधन, संपन्न, सर्व सुख समृद्ध युक्त करके एक अच्छा भवन रहने को दिया. इस तरह दोनों के सभी दु:ख दूर हो गए.

सरल पूजा विधि :

  • अधिक मास की परमा एकादशी व्रत के लिए दशमी तिथि की रात्रि सादा भोजन लें, नमक न खाएं. 
  • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में शौचादि से निवृत्त होकर दंतधावन करके 12 कुल्ले सादे पानी से करके शुद्ध हो जाएं.
  • सूर्य उदय होने के पूर्व स्नान करके श्वेत स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • भगवान श्री विष्णु के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें.
  • एकादशी की व्रत कथा पढ़ें.
  • आरती करें. 
  • श्री विष्णु के मंत्रों का जाप करें.
  • ईश्वर स्मरण करते हुए दिन व्यतीत करें.
  • पारण वाले दिन किसी दूसरे के घर का भोजन ग्रहण न करें.
  • भूमि पर सोएं.
  • ब्रह्मचर्य व्रत रखें. 

महत्व : अधिक मास यानी पुरुषोत्तम महीने के देवता भगवान श्रीहरि विष्णु हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस एकादशी के संबंध में माना जाता है कि यह माह श्री विष्णु को प्रिय हैं, क्योंकि उन्होंने ही मलमास के महीने को अधिक/पुरुषोत्तम मास का नाम दिया था, जो कि तीन वर्ष में एक बार आता है. इस दिन भगवान श्री विष्‍णु की पूजा करना सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है. वैसे तो अधिक मास में शुभ कार्य करने की मनाही हैं, लेकिन इस महीने में धार्मिक कार्य करना शुभ फलदायी माना जाता है. 

परमा एकादशी व्रत के पूर्व रात्रि यानी दशमी तिथि से एकादशी व्रत के दिन लाल मसूर दाल, चना, शहद, शाक और लहसुन, प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए. यह एकादशी व्रत धन, लक्ष्मी, पुत्र-पौत्रादि का सुख, हर प्रकार की समृद्धि और पुण्य तथा मोक्ष को देने वाली मानी गई है. इसीलिए इस पवित्र महीने में तथा खासकर इस दौरान आने वाली सभी एकादशी तिथि पर व्रत-उपवास आदि रखकर, पूजा-पाठ करने, दान-धर्म देने का विशेष महत्व कहा गया है. इतना ही नहीं पूरे विधि-विधान से इस दिन भगवान श्री विष्णु का पूजन करने और उपवास रखने से सभी पापों का नाश भी हो जाता है. 

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